पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू की शायरी में गुस्सा:कुर्सी के कीड़े, तख्त गिराने और देश में जागने की चेतावनी

पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का शायराना अंदाज अब गुस्से में नजर आ रहा है। इसकी गवाही उनकी एक नई शायरी देती है, जिसमें सिद्धू कहते हैं— गुरु, मैं बचाता रहा किमक से मकान अपना ,
मगर चंद कुर्सी के कीड़े, पूरा मुल्क खा गए।
अब खाक नशीनों, उठो—जागो और देखो,
वक्त कहा आन पहुंचा है,
जब तख्त गिराए जाएंगे
और ताज उछाले जाएंगे।

जेबी शायरी सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। अपनी बेबाक जुबान और शायरी के लिए पहचाने जाने वाले सिद्धू ने इस इसमें भी सीधे शब्दों में कुछ न कहकर, इशारों-इशारों में राजनीति को जवाब दे दिया है। सिद्धू इस शायरी में कहते है—मतलब पड़ा तो सारे अनबंद हो गए, गुरु-नेवलों के भी सांपों से संबंध हो गए राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सिद्धू की यह दोनों शायरी मौजूदा राजनीतिक हालात, भीतरखाने चल रही खींचतान और विश्वासघात की ओर इशारा करती है। शायरी में न तो किसी का नाम है, न ही किसी पार्टी का जिक्र, लेकिन संकेत इतने स्पष्ट हैं कि संदेश अपने आप पहुंच जाता है। सोशल मीडिया पर लोग इन शायरी को अलग-अलग तरीके से पढ़ रहे हैं। कोई इसे सिद्धू की राजनीति में वापसी का संकेत मान रहा है, तो कोई इसे उन लोगों के लिए चेतावनी बता रहा है जो राजनीति को सिर्फ खेल समझ बैठे हैं। कुल मिलाकर, नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शायरी जब सियासत से टकराती है, तो आवाज दूर तक जाती है। बिना नाम लिए, बिना सीधे हमला किए सिर्फ अलफाजों से राजनीति को जवाब देना, यही सिद्धू का अंदाज है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *