जयपुर फुट यूएसए और राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA), न्यूयॉर्क ने महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री तथा महाराष्ट्र विधानसभा के पांच बार के विधायक राज के. पुरोहित के अचानक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके निधन की सूचना से न्यूयॉर्क समेत पूरे प्रवासी राजस्थानी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। 71 वर्षीय पुरोहित का निधन शनिवार रात मुंबई के एक अस्पताल में हुआ। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। वे भाजपा मुंबई के अध्यक्ष रह चुके थे और महाराष्ट्र विधानसभा के पांच बार विधायक चुने गए थे। उनका जन्म सिरोही जिले के फूंगनी गांव में हुआ था। जयपुर फुट यूएसए और RANA न्यूयॉर्क के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने शोक संदेश में कहा कि राज के. पुरोहित जयपुर फुट और RANA के लिए एक मजबूत स्तंभ और बड़े समर्थक थे। वे दोस्तों के सच्चे मित्र थे और मुंबई में हमेशा जरूरतमंदों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने कहा कि पुरोहित न केवल एक महान जननेता थे, बल्कि उत्तर भारत और विशेषकर प्रवासी राजस्थानियों की एक सशक्त आवाज़ भी थे। प्रेम भंडारी ने कहा- उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। ईश्वर शोक संतप्त परिवार को यह गहन दुख सहने की शक्ति प्रदान करें और दिवंगत आत्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें। उन्होंने बताया कि राज के. पुरोहित ने राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) न्यूयॉर्क के चार प्रमुख कन्वेंशनों—साल 2003, 2006, 2010 और 2014 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे न केवल RANA न्यूयॉर्क से जुड़े रहे, बल्कि जयपुर फुट यूएसए के कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता निभाते रहे। साल 2016 में नागपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की दीक्षा भूमि पर महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से आयोजित दिव्यांग शिविर में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। इस शिविर का आयोजन जयपुर फुट यूएसए ने अपनी मातृ संस्था भगवान महावीर दिव्यांग सहायता समिति के साथ मिलकर किया था, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी सहयोग रहा। प्रेम भंडारी ने बताया कि साल 2006 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान, अखिल भारतीय प्रवासी महासंघ के अध्यक्ष के रूप में आर. के. राजपुरोहित ने प्रेम भंडारी को “शेर-ए-मैनहट्टन” की उपाधि से सम्मानित करवाया था। यह सम्मान उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हाथों प्रदान किया गया था। उन्होंने कहा कि आर. के. राजपुरोहित न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे उत्तर भारत में प्रवासी राजस्थानियों की प्रमुख आवाज़ थे। कोलाबा जैसी सीट से भारतीय जनता पार्टी को पहली जीत दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। राना न्यू यॉर्क सचिव रवि जरगढ़ ने बताया- राज के. पुरोहित के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए RANA और जयपुर फुट यूएसए की ओर से 21 जनवरी, बुधवार को न्यूयॉर्क में एक शोक बैठक आयोजित की जाएगी। राजस्थानी भाषा के सशक्त पैरोकार थे आर. के. राजपुरोहित बता दें कि आर. के. राजपुरोहित राजस्थानी भाषा के प्रबल समर्थक रहे थे। राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए वे निरंतर सक्रिय रहे और इस आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। साल 2011 में अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के अंतरराष्ट्रीय संयोजक एवं राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के मीडिया चेयरमैन प्रेम भंडारी के नेतृत्व में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष व तत्कालीन राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व मंत्री आर. के. राजपुरोहित सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। इससे पहले प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान हाउस में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह से भी मुलाकात की थी। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में राजस्थानी भाषा को मान्यता दिए जाने के मुद्दे पर विस्तार से संवाद हुआ। दोनों ही शीर्ष नेताओं ने पारिवारिक और आत्मीय वातावरण में प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और राजस्थानी भाषा की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्ता को स्वीकार किया। इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति के पति देवीसिंह शेखावत ने स्वयं को प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बताते हुए ठेठ राजस्थानी में बातचीत की, जिससे उन्होंने सभी का दिल जीत लिया। पुरोहित मुख्य रूप से मुंबादेवी से चार बार और कोलाबा से एक बार विधायक चुने गए थे। वे महाराष्ट्र सरकार में गृहनिर्माण मंत्री तथा अन्य महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके थे।


