पूर्व विधायक, महिला एसपी से बोले- पुलिस आरोपियों से मिली:आदमी मरा है, कीड़ा-मकोड़ा है क्या, सस्पेक्ट को छोड़ा क्यों? SP बोलीं- 1 कस्टोडियन डेथ हम झेल चुके

राजसमंद के फाइनेंसर हरीश जोशी हत्याकांड को लेकर बीजेपी के पूर्व मावली विधायक धर्मनारायण जोशी कलेक्टर के चैम्बर में एसपी ममता गुप्ता पर भड़क गए। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जमकर खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा- पुलिस आरोपियों से मिली हुई है, आप जांच का डायरेक्शन मत घुमाओ एसपी साहिबा। डेडबॉडी पुलिस को नहीं मिली, जनता को मिली है। पुलिस तो यही घूम रही है, घरवालों से पूछ रही है। आदमी मरा है, कोई कीड़ा-मकोड़ा मरा है क्या? नाम इनको संदिग्ध का एडवांस में दे दिया। लोग आरोपी के घर जाते हैं तो पुलिस वहां तैयार मिलती है। पोस्टमॉर्टम का बहाना बना कर जांच का डायरेक्शन मत घुमाओ। उधर एसपी कहती रही- आप मेरी बात नहीं सुन रहे, हमने टीम बैठाई है और बिना सबूत के किसी को अंदर नहीं रख सकते। ये नियम है। मामला राजसमंद के कलेक्टर ऑफिस का बुधवार शाम 5 बजे का है। 30 दिसंबर से लापता थे फाइनेंसर दरअसल, राजसमंद में फाइनेंस का काम करने वाले हरीश जोशी 30 दिसम्बर से लापता था। उनके घरवालों ने 31 दिसंबर को कांकरोली थाने में मिसिंग रिपोर्ट दी थी। 6 दिन बाद 5 दिसंबर तक भी जब कोई सुराग नहीं लगा तो परिजनों ने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना दे दिया था। इस दौरान हरीश की माता और पत्नी की तबीयत बिगड़ गई थी। परिजनों ने जसवंत सिंह निवासी पलासमा पर संदेह जताया था। इस दौरान धरने पर पहुंची राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने 24 घंटे में आरोपियों का पता लगाने का अल्टीमेटम पुलिस को दिया था। कुएं में मिला था शव अगले ही दिन 6 दिसंबर को हरीश जोशी का शव घासा थाना क्षेत्र में एक कुएं से मिला था। आरोपी और पुलिस की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए 7 दिसंबर को परिजन और पूर्व मावली विधायक धर्मनारायण जोशी के साथ धरने पर कलेक्ट्रेट पर बैठ गए। इसके बाद समझाइश के लिए कलेक्टर के चैम्बर में पहुंचे थे। यही पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, राजसमंद एसपी ममता गुप्ता पर भड़क गए। अब पढ़िए पूर्व विधायक और एसपी की बातचीत पूर्व विधायक- क्या जवाब है पुलिस का इस सब के पास जब परिजनों ने नाम ही दे दिया। आप जांच का डायरेक्शन मत घुमाओ। एसपी ममता- मैंने तो बात का जवाब दिया है आपको। आपने कोई जांच या कोई टीम बैठाई क्या? एसपी ममता- हां, बैठाई है। पूर्व विधायक- विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने जब प्रेशर दिया न तब आपने ये जांच शुरू की है। उसके पहले आदमी (हरीश) गायब है पुलिस ने कुछ नहीं किया। आरोपी को 1 घंटा रखकर क्यों छोड़ा? एसपी ममता गुप्ता- डेडबॉडी कल (6 दिसंबर) को मिली है। सस्पेक्ट हो हम परसो (5 दिसंबर) को ले आए थे। देखिए, आपको भी पता है किसी को बिना सबूत के हम लंबे समय तक कस्टडी में नहीं रख सकते। एक कस्टोडियन डेथ हम कांकरोली में झेल चुके हैं। हम तो ये सोच कर चल रहे थे कि हरीश जिंदा है। पूर्व विधायक- देखिए, आप 4 घंटे, 10 घंटे रख सकते हैं, मारपीट मत करिए। पूछताछ कीजिए न। 1 घंटे में उसे रवाना कर दिया। एसपी ममता- ये आरोप तो गलत है। FIR दर्ज तो होगी न एंडोर्समेंट भी होगा। पूर्व विधायक- ये किसको समझा रहे हैं कलेक्टर साहब, ये सब ऑनलाइन नहीं है क्या? एसपी ममता- जो विषय ही नहीं है उसपर चर्चा कर रहे हैं। पूर्व विधायक- कलेक्टर साहब आप संदिग्ध को 1 घंटे से ज्यादा नहीं रख सकते क्या? क्या जवाब है इसका, पुलिस के पास गाडी नहीं है। पुलिस कहां-कहां गए। पुलिस जांच को घुमा रही है।

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