विक्की कुमार | अमृतसर महीनों तक पेंडेंसी निपटारे में नंबर वन रहने वाला अमृतसर अब प्रशासनिक सुस्ती की कीमत चुका रहा है। 0.55 प्रतिशत लंबित फाइलों के साथ जिला सीधे 19वें स्थान पर पहुंच गया है जो एक महीने पहले 14वें नंबर पर था। इससे पहले 2024 में अमृतसर नंबर 1 पर था। अब स्थिति यह बन चुकी है कि 23 जिलों में से अमृतसर 19वें नंबर पर है और यह स्थान सबसे निचले स्तर के 5 जिलों में से है और यह 5 जिले रेड जोन में है। आंकड़ों के मुताबिक जिले के 41 सेवा केंद्रों में 4,28,309 आवेदनों में से 2512 फाइलें लंबित पड़ी हैं। यानी हर हजार आवेदनों पर लगभग 5-6 फाइलें तय समयसीमा से बाहर हैं। यह गिरावट उस जिले में आई है जो हाल तक ‘जीरो पेंडेंसी’ मॉडल के तौर पर पेश किया जाता रहा। राज्य के 23 जिलों की सूची में निचले पायदान पर खिसकना संकेत है कि विभागीय स्तर पर मॉनिटरिंग ढीली पड़ी है। तुलना करें तो तरनतारन में 1,96,301 आवेदनों में से 1,171 फाइलें लंबित हैं जो रेड जोन में है। इसके अलावा एसएएस नगर, कपूरथला और फिरोजपुर भी रेड जोन में चिह्नित हैं। पेंडेंसी के आंकड़ों को देखा जाएं तो सबसे अधिक पेंडेंसी नगर निगम में है। नगर निगम में 986 फाइले पेंडिंग पड़ी हुई है। निगम में अलग-अलग अधिकारियों व पार्षदों की आईडी में 867, जबकि ज्वाइंट कमिश्नर की आईडी में 119 फाइलें पेंडिंग है। इनके अलावा एसडीएम अमृतसर-1 में 280 है, जिसमें से 180 फाइलें तो नायब तहसीलदार करनवीर सिंह के खाते में ही पेंडिंग है। इनके अलावा एसडीएम अमृतसर में 242 फाइलें पेंडिंग हैं, जिसमें से 52 फाइलें तहसीलदार पुनीत बांसल के खाते में पेंडिंग है। एसडीएम बाबा बकाला में 202, एसडीएम लोपोके के पास 163, एसएसपी देहाती में 115, एसडीएम मजीठा में 105, एसडीएम अजनाला में 81, एडीसी (जनरल) में 55, डीआरओ में 50, असिस्टेंट कमिश्नर (जनरल) 38, सीएमओ में 32, एडीसी (रुरल डिवेल्पमेंट) के पास 83, एडीसी (अर्बन डिवेल्पमेंट) के पास 24, सीईओ कैंट के पास 18, डीएसएसओ के पास 17, डीएमएसके के पास 13, एमएस के पास 3, तरनतारन जिले में 3, डिस्ट्रिक वेलफेयर ऑफिसर के पास 2 फाइलें पेंडिंग पड़ी हुई है। जानकारी के अनुसार कई विभागों में समयसीमा की निगरानी कमजोर पड़ी है। सेवा केंद्रों पर आवेदन तो तेजी से लिए जा रहे हैं लेकिन बैक-एंड वेरिफिकेशन और अनुमोदन की रफ्तार उतनी ही सुस्त है। इसका सीधा असर नागरिक सेवाओं पर पड़ रहा है, जाति/आय प्रमाणपत्र, लाइसेंस, रजिस्ट्री और अन्य राजस्व सेवाओं में देरी बढ़ी है। प्रशासन ने पेंडेंसी घटाने के निर्देश जारी करने की बात कही है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ निर्देशों से काम नहीं चलेगा। डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह का कहना है कि पेंडेंसी खत्म करने को लेकर समय-समय पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जाती है। उनका कहना है कि सबसे अधिक परेशानी निगम की फाइलों में आती है। इसे लेकर उनके अधिकारी निगम अधिकारियों के साथ खास तौर पर मुलाकात करके उनका हल करवाते है। उन्होंने कहा कि जल्द ही यह पेंडेंसी खत्म होगी और अमृतसर नंबर एक पर फिर से आएगा।


