भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम ने शहर की 4 लाख प्रॉपर्टीज का सर्वे करने को लेकर सितंबर 2025 में 6 माह का ठेका कोलकाता की कंपनी को दिया था। जो अब तक फेल साबित हुआ है। दरअसल, कंपनी 5 माह में 41 हजार (10%) प्रॉपर्टी का डाटा ही जुटा पाई है। सर्वे को लेकर बिल्डिंग मालिक का नाम व अन्य डिटेल सहित 45 कॉलम भरने होते हैं। ऐसे में एक मुलाजिम दिन में 20 प्रापर्टियों का सर्वे कर सकता है। बचे हुए दिनों में 700 बंदों को हायर कर लिया जाए तो भी 3.60 लाख प्रापर्टियों का सर्वे असंभव है। वहीं, अब सोशल मीडिया पर सर्वे कराए जाने को लेकर हायरिंग के लिए भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। निगम की बिल्डिंग में कमिश्नर का पोस्टर लगा सर्वेक्षण टीम का सहयोग करने की अपील की जा रही है। सर्वे का काम प्राइवेट कंपनी को दिया गया है। ऐसे में किसी भी भर्ती का अधिकार निगम के पास नहीं है। कमिश्नर का पोस्टर लिखे कंटेंट के नीचे निगम कमिश्नर का पोस्टर अपलोड कर गुमराह किया जा रहा ताकि अधिक से अधिक युवा आकर्षित हों। जबकि कंपनी के पोस्टर का सोशल मीडिया पर कोई पता नहीं है। निगम के एक बड़े अफसर ने कहा कि ऐसी कोई भर्ती के बारे जानकारी नहीं है। कंपनी ही हायरिंग कर सकती है। पोस्टर पर सर्वे के लिए टीम का सहयोग करने का जिक्र है। हैरानी जनक तो यह है कि 15 मार्च को कंपनी के टेंडर की अवधि खत्म हो रही है। इधर 25 दिन पहले हायरिंग का सोशल मीडिया पर प्रचार किया जा रहा। निगम सूत्रों की मानें तो शुरू से ही कंपनी सर्वे को लेकर लापरवाह रही है। डोर-टू-डोर सर्वे को लेकर 20-30 से अधिक मुलाजिम लगाए ही नहीं गए हैं। 6 माह में सर्वे पूरा कराने को 180 से 200 मुलाजिम लगाने की जरूरत थी। सोशल मीडिया पर जीआईएस सर्वे को लेकर हायरिंग की वायरल पोस्ट। सर्वे फेल होने की वजह निगम और कंपनी के अफसरों में तालमेल न होना भी है। हाल यह है कि कंपनी की ओर से प्रापर्टियों का सर्वे तो पूरा कर लिया गया लेकिन रिपोर्ट अमृतसर में कार्यरत पीएमआईडीसी व प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अफसरों को नहीं सौंपी गई। जो भी सर्वे रिपोर्ट सामने आती उसका 10% काम निगम को चेक करना था कि सही से काम हो रहा या नहीं। गौर हो कि शहर की सभी संपत्तियों जैसे घर, व्यावसायिक और आवासीय इमारतें, दुकानें, फैक्ट्रियां आदि की डिजिटल मैपिंग के लिए जीआईएस सर्वे शुरू कराया गया था। खास तौर पर वॉल्ड सिटी की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वहां ड्रोन के माध्यम से लिडार सर्वे का काम भी कराया गया। लेकिन सर्वे सिर्फ कंपनी के कागजों तक ही सिमटकर रह गया।


