परिवहन विभाग के निरीक्षक काे थाने में बैठाने और मारपीट मामले में चल रही विभाग के निरीक्षकों की हड़ताल में शुक्रवार से अधिकारी और मंत्रालयिक कर्मचारी भी कूद पड़े। सभी ने पेनडाउन रखा।नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन की जांच, आरसी ट्रांसफर, ऑनलाइन चालान जमा करने, परमिट जैसे आमजन से जुड़े सभी काम ठप रहे। प्रदेश में पिछले चार दिन से चल रही इस हड़ताल के कारण अब तक करीब 80 कराेड़ के रेवेन्यू का नुकसान हो चुका है। उदयपुर में करीब 500 लाइसेंस के ट्रायल नहीं हुए। चालान नहीं बनने से करीब 28 लाख रुपए की हानि हुई है। किसी के पास जवाब ही नहीं कि कब थमेगा यह सिलसिला हड़ताल को चार दिन बीतने के बाद भी मुख्यालय स्तर पर काेई फैसला नहीं हुआ है। इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है कि हड़ताल कब थमेगी। विभाग के अधिकारियाें का कहना है कि यह विवाद अब दाे महकमाें की लड़ाई में बदल गया है। इस पूरे सप्ताह में महज एक दिन कार्य हुआ है। उदयपुर ऑफिस में आरटीओ-डीटीओ सहित 50 अधिकारी-कर्मचारी हैं। आठ निरीक्षक हैं। प्रदेशभर में 378 परिवहन निरीक्षक हैं और करीब 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। यह है मामला शनिवार काे धाैलपुर में एसपी सुमित मेहरड़ा ने दाे परिवहन निरीक्षकों काे थाने में बैठाकर 5 घंटे तक पूछताछ की। कर्मचारी एसपी को एपीओ करने की मांग पर अड़े हैं।


