हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती-2022 पेपरलीक से जुड़े ईडी मामले में मास्टरमाइंड भूपेन्द्र सारण, अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह, अरूण शर्मा और पुखराज की जमानत को खारिज कर दिया हैं। जस्टिस अशोक कुमार जैन की अदालत ने चारों आरोपियों की जमानत अर्जी को खारिज किया। चारों की ओर से कहा गया था कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया हैं। वे लंबे समय से जेल में है। ऐसे में जमानत का लाभ दिया जाए। इसका विरोध करते हुए ईडी की ओर से अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज ने कहा कि पेपरलीक में बड़े पैमाने में रुपयों का लेनदेन हुआ हैं। यह मामला पेपरलीक जैसे गंभीर अपराध से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता हैं। दरअसल, उदयपुर जिले के बेकरिया थाना पुलिस ने 24 दिसंबर 2022 को एक बस को पकड़ा था। पेपर लीक के सरगना चलती बस में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के 49 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पेपर हल करवा रहे थे। इसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ। इसके बाद मामले की जांच एसओजी के पास चली गई। वहीं ईडी ने भी बड़े पैमाने में रुपयों के लेनदेन के चलते अलग से मामला दर्ज किया था। पुलिस के मामले में सारण को मिल चुकी है जमानत
इसी पेपरलीक को लेकर पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में भूपेन्द्र सारण को करीब 16 दिन पहले हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी हैं। वहीं इस मामले में पूर्व आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा की जमानत याचिका को हाईकोर्ट खारिज कर चुका हैं। एसओजी के अनुसार, कटारा को इस परीक्षा के पेपर और उत्तर कुंजी तैयार करने का दायित्व मिला था। लेकिन उसने पेपर लीक कर दिया। कटारा के घर से 51.20 लाख रुपए नकद और 541 ग्राम सोने के 9 आभूषण बरामद हुए थे। परीक्षा से 60 दिन पहले ही पेपर हुआ लीक
चार्जशीट से सामने आया था कि 24 दिसंबर 2022 को होने वाले सीनियर टीचर एग्जाम का पेपर परीक्षा से 60 दिन पहले अक्टूबर में ही लीक हो गया था। RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा पेपर तैयार होते ही सभी सेट की मूल कॉपी अपने सरकारी आवास पर ले गया था। कटारा के पास विशेषज्ञों से पेपर सेट कराने की जिम्मेदारी थी। कटारा ने अपने भांजे विजय डामोर से सभी सवाल रजिस्टर में लिखवा लिए। इसके बाद उसने प्रिंटिंग के लिए पेपर वापस ऑफिस में जमा करा दिया। भांजे विजय के लिखे रजिस्टर को कटारा ने मास्टरमाइंड शेर सिंह मीणा को दिया। शेर सिंह ने इसकी फोटो अपने मोबाइल में खींची। फोटो से पेपर टाइप कर इसे भूपेन्द्र सारण गिरोह व अन्य को बेच दिया। बाद में सबूत मिटाने के लिए रजिस्टर को जला दिया।


