पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की गड़बड़ियों की जांच को लेकर महालेखाकार का विशेष ऑडिट शुरू हो गया है। ऑडिट की विशेष टीम ने रांची स्थित हेड वर्क्स डिवीजन और डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजन के कार्यालय से कागजात लेकर अपना काम शुरू कर दिया है। विभाग ने आठ माह पूर्व कई डिवीजनों का स्पेशल ऑडिट करने का आग्रह महालेखाकार से किया था। लेकिन, उसके लिए आवश्यक कागजात कार्यालय उपलब्ध नहीं करा रहा था। प्रधान महालेखाकर ने इसकी शिकायत कर कागजात उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा था। लेकिन, कागजात नहीं सौंपे गए। पेयजल विभाग की गड़बड़ियों पर आरोपियों के यहां ईडी की छापेमारी और पूछताछ के बाद प्रधान महालेखाकार ने विभाग के प्रधान सचिव के साथ इंट्री कान्फ्रेंस कर कागजात उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कई महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा भी हुई। विभागीय प्रधान ने गड़बड़ी के कागजात उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया, जिसके बाद ऑडिट टीम ने जांच शुरू की है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जल्द ही एक दर्जन दूसरे डिवीजन का भी स्पेशल ऑडिट शुरू होगा। ईडी की छापेमारी और पूछताछ के बाद सक्रिय हुआ पेयजल विभाग अब तक 22.93 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का मामला उजागर
ईडी ने अब तक 22 करोड़ 93 लाख 42 हजार 947 रुपए की अवैध निकासी का मामला उजागर किया है। रांची हेड वर्क्स डिवीजन में वर्ष 2023 में विभाग के खाते से 2.71 करोड़ रुपए की फर्जी निकासी को लेकर प्राथमिकी हुई थी। जांच में विभाग और रांची कोषागार कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ था। क्या था विवाद
रांची स्थित हेड वर्क्स डिविजन में वित्तीय गड़बड़ी की बात की पुष्टि होने पर स्पेशल एडिट करने के लिए विभाग ने प्रिंसिपल एजी को पत्र लिखा था। उसके बाद विभाग 45 और कार्यालयों का स्पेशल ऑडिट करने के लिए आग्रह किया था। उन्होंने विभागीय प्रधान को लिखा है कि रांची हेड वर्क्स डिवीजन का विशेष ऑडिट करने के अनुरोध के जवाब में, इस कार्यालय ने 20 सितंबर 2024 को ऑडिट कार्य शुरू करने के लिए अद्यतन रखे जाने वाले अभिलेखों की एक सूची के लिए अनुरोध किया था। लेकिन, इस कार्यालय को ऐसी कोई सूची प्राप्त नहीं हुई, इसलिए उसकी जांच नहीं की जा सकी थी। वित्तीय अनियमितता की फेहरिस्त लंबी
उल्लेखनीय है कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में वित्तीय अनियमितता की लंबी फेहरिस्त है। विभाग ने ऐसी बातें स्वीकार करते हुए छह माह पहले 43 कार्य प्रमंडल, दो अंचल और एक जोन कार्यालय का स्पेशल ऑडिट कराने के लिए प्रधान महालेखाकार से आग्रह किया था। प्रधान महालेखाकार ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि विभाग से उसे आवश्यक कागजात नहीं मिले हैं। इसलिए, स्पेशल ऑडिट करना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने इस मामले को लेकर एक नोडल अधिकारी तैनात करने को भी कहा था।


