झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार को पैनम कोल माइंस कंपनी की ओर से अवैध खनन करने के मामले पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पैनम कोल कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कंपनी के निदेशक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है और कुर्की जब्ती का आदेश भी दिया गया है। कंपनी के अधिकारियों का पता बर्द्धमान में है। इस पर अदालत ने बर्द्धमान एसपी को कुर्की-जब्ती करने में झारखंड पुलिस का सहयोग करने का आदेश दिया। अदालत ने पाकुड़ पुलिस को भी जांच में सहयोग करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। इस दौरान प्रार्थी रामसुभग सिंह की ओर से पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने का आग्रह किया गया। इस पर अदालत ने कहा कि अगली तिथि को इस बिंदु पर विचार किया जा सकता है। पिछली सुनवाई के दौरान पैनम कोल कंपनी के अवैध खनन की बात स्वीकार किए जाने और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी और दो दिनों के अंदर सरकार को कार्रवाई की जानकारी देने का निर्देश दिया था। मालूम हो कि रामसुभग सिंह ने जनहित याचिका दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि 2015 में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस मामले में राज्य सरकार ने गड़बड़ी की बात स्वीकार की, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो गलत है। वर्ष 2017 में तत्कालीन खनन सचिव सुनील कुमार वर्णवाल ने शपथ पत्र दाखिल कर बताया था कि कंपनी ने गड़बड़ी की है और अवैध माइनिंग से विस्थापित हुए लोगों के लिए कंपनी ने कुछ नहीं किया है।


