झुंझुनूं की 18 साल की क्रिकेटर हैप्पी खीचड़ वुमेंस प्रीमियर लीग (WPL) की गुजरात जायन्ट्स टीम ने 10 लाख रुपए खरीदा है। तेज गेंदबाज और आक्रामक बल्लेबाज हैप्पी की क्रिकेट में सक्सेस में झुंझुनूं में गर्ल्स क्रिकेट की दिशा ही बदल दी है। जब हैप्पी ने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उन्हें अपने घर में ही विरोध का सामना करना पड़ा था। लड़कियों के लिए अलग एकेडमी नहीं होने से भी उन्हें काफी परेशानी हुई, लेकिन उनके पिता और कोच की जिद ने उन्हें सक्सेसफुल क्रिकेटर बना दिया। घर के बाहर लगा नेट, रोज 6 घंटे की प्रैक्टिस हैप्पी ने बताया कि झुंझुनूं में लड़कियों के लिए अलग से कोई बड़ा मैदान या उचित प्रैक्टिस स्पेस नहीं था। जो छोटे मैदान थे, वे घर से बहुत दूर थे और वहां भीड़ रहती थी, हैप्पी अक्सर इस कारण परेशान रहती थी। पिता राजेश कहते हैं- मैंने घर के बाहर नेट इसलिए लगवाया क्योंकि मेरी बेटी को सिर्फ एक सही मौका चाहिए था, बाकी मेहनत उसने खुद कर ली। आज वो राजस्थान की सबसे मजबूत ऑलराउंडरह है। हैप्पी आज भी इसी नेट में 6 घंटे प्रैक्टिस करती है। पहली बार क्रिकेट खेला तो दादी नाराज हुईं- हैप्पी हैप्पी ने बताया कि 10 साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उनकी दादी ने विरोध जताया था, लेकिन आज वो मुझे खेलता देखकर गर्व अनुभव करती हैं। कई बार भावुक भी हो जाती हैं। वहीं, उनके दादा का सपना था कि वो देश के लिए क्रिकेट खेले। हैप्पी का कहना है कि – अगर आपकी बच्ची में खेल की रुचि है, तो उसे प्रोत्साहित करें, खेल पढ़ाई से कम नहीं है। हैप्पी की छोटी बहन अनुशी खीचड़ भी क्रिकेट खेलती है। अनुशी राजस्थान अंडर-15 सीनियर ट्रेनिंग में शामिल हो चुकी है। हैप्पी की सक्सेस के बाद बदला माहौल हैप्पी की क्रिकेट में सक्सेस के बाद झुंझुनूं में गर्ल्स क्रिकेट को लेकर माहौल बदला है। झुंझुनूं एकेडमी के चेयरमैन आकाश/दिलीप मोदी और उनकी टीम ने लड़कियों के लिए मुफ्त ट्रेनिंग सेशन शुरू किए हैं। पहले एकेडमी में एक भी लड़की नहीं दिखती थी, अब करीब 100 लड़कियां यहां डेली प्रैक्टिस करती है। चार टीमों ने ट्रायल के लिए बुलाया झुंझुनूं की इस युवा क्रिकेटर ने बताया कि WPL के ऑक्शन से पहले उन्हें चार टीमों ने ट्रायल के लिए बुलाया था। फाइनली उन्हें गुजरात ने खरीदा है।


