जांजगीर-चांपा जिले के चर्चित पोरा बाई नकल मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने फैसाल सुनाया है। कोर्ट ने छात्रा पोरा बाई, स्कूल प्राचार्य, केंद्राध्यक्ष समेत 4 लोगों को दोषी मानते हुए 5-5 साल के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला करीब 17 साल पुराना है। मामला साल 2008 का है। बिर्रा निवासी पोरा बाई ने बारहवीं की परीक्षा में प्रदेश की मेरिट लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया था। इस सफलता पर संदेह होने पर माध्यमिक शिक्षा मंडल ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कराई। जांच के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं में अनियमितता पाई गई। इसके बाद बम्हनीडीह थाने में छात्रा समेत 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चांपा की अदालत में पेश किया था। उस समय अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ शासन ने 25 दिसंबर 2020 को अपील दायर की थी। शासन की अपील पर पलटा फैसला
इसी अपील पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश गणेश राम पटेल ने सुनवाई करते हुए अब सजा सुनाई है। कोर्ट ने छात्रा पोरा बाई, केंद्राध्यक्ष फूल साय न., बिर्रा हाईस्कूल के प्राचार्य एसएल जाटव और दीपक जाटव को दस्तावेजों में हेराफेरी का दोषी पाया। कोर्ट बोला- मेहनती छात्रों के हक पर चोट सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि इस तरह के कृत्य शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं और उन छात्रों के साथ अन्याय करते हैं जो मेहनत से अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।


