पोस्ट-कोविड दौर में हिप आर्थराइटिस के मामले बढ़े:दवाइयों और अल्कोहल का असर भी चिंता का विषय; इंडोकॉन-2026 में दूसरा दिन हिप प्रिज़र्वेशन पर रहा फोकस

कोविड के बाद हिप आर्थराइटिस के मामले 30% तक बढ़े हैं। कई युवा मरीज बिना किसी गंभीर चोट के भी हिप समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में प्रिजर्वेशन तकनीक भविष्य में बड़े ऑपरेशन से बचाने का कारगर विकल्प है। ऐसे ही दवाइयों का अत्यधिक उपयोग और अल्कोहल का सेवन हिप जॉइंट कमजोर करने का बड़ा कारण है। ये सभी फैक्टर्स चिंता का विषय है। यह बात शनिवार को इंदौर में आयोजित तीसरे नेशनल हिप कोर्स और इंडोकॉन 2026 के दूसरे दिन ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हिप प्रिजर्वेशन, हिप डिस्प्लेशिया और तेजी से बढ़ते हिप आर्थराइटिस जैसे जटिल विषयों पर एक्सपर्ट्स ने कही। इसमें देश-विदेश से आए एक्सपर्टस ने हिप फ्रैक्चर, फीमरल नेक, ट्रोकेन्टर एरिया और हिप जॉइंट की संरचना गड़बड़ियों से जुड़े मामलों पर अपने अनुभव साझा किए। संक्रमण से लेकर ओस्टियोनेक्रोसिस तक, तकनीक पर केंद्रित रहा सेशन दूसरे दिन की शुरुआत इन्फेक्शन मॉड्यूल से हुई, जिसमें पोस्ट-ऑपरेटिव संक्रमण, हड्डी से जुड़े संक्रमण, एफआरआई (Fracture Related Infection) और पीजेआई (Prosthetic Joint Infection) के अंतर और उनके प्रभावी प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद फीमरल नेक, ट्रोकेन्टर और ओस्टियोनेक्रोसिस से जुड़े सत्रों में केस स्टडी, लाइव वीडियो और पॉइंटर टॉक के जरिए आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की जानकारी दी गई। हिप प्रिजर्वेशन बना दिन खास मुद्दा इंग्लैंड से आए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ डॉ. अजय मालवीया ने बताया कि बड़ी संख्या में युवा मरीज हिप जोड़ में दर्द, चलने में परेशानी और शुरुआती मूवमेंट रुकावट की शिकायत लेकर आते हैं। हिप डिस्प्लेशिया और बॉल–एंड–सॉकेट जॉइंट के आकार में असमानता समय के साथ आर्थराइटिस का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में हिप प्रिजर्वेशन तकनीक हिप रिप्लेसमेंट को वर्षों तक टालने में मददगार साबित हो रही है। बिना किसी गंभीर चोट के भी हिप समस्याओं से जूझ रहे हैं युवा नागपुर के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सुश्रुत बाभुलकर ने कहा कि कोविड के बाद हिप आर्थराइटिस के मामलों में 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि कई युवा मरीज बिना किसी गंभीर चोट के भी हिप समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में प्रिजर्वेशन तकनीक भविष्य में बड़े ऑपरेशन से बचाने का कारगर विकल्प बन रही है। दवाइयों और अल्कोहल का असर गुजरात से आए हिप और पेल्विक विशेषज्ञ डॉ. कश्यप अद्रेंशना ने बताया कि दवाइयों का अत्यधिक उपयोग और अल्कोहल सेवन हिप जॉइंट की रक्त-आपूर्ति को प्रभावित करता है। इससे जोड़ की प्राकृतिक संरचना कमजोर होती है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच और समय पर उपचार से इन मरीजों में गंभीर सर्जरी की आवश्यकता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्किल लैब में मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण स्किल लैब सेशन में प्रतिभागियों को एसीटैबुलर तैयारी, एंगल ब्लेड प्लेट और 3-डी आधारित हिप तकनीकों की प्रेक्टिस कराई गई। युवा सर्जनों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के सत्र सर्जरी की बारीकियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं। तीसरे दिन जटिल हिप सर्जरी पर रहेगा फोकस इंडोकॉन 2026 के तीसरे दिन पेरी-प्रोस्थेटिक फ्रैक्चर, हिप रिविजन सर्जरी, रीकरेन्ट डिसलोकेशन और विशेष रोग स्थितियों में हिप आर्थ्रोप्लास्टी जैसे जटिल विषयों पर केंद्रित सेशन आयोजित किए जाएंगे।

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