प्रगतिशील किसान:युवा किसान ने किया नवाचार; दोमंजिला खेती…गड्‌ढा विधि अपनाई, मचान पर उगाई लौकी

कीर्तिमान वही स्थापित करता है, जिसमें कुछ नया करने की चाह और लगन हो। बूंदी जिले के बंथली निवासी युवा किसान भैरुलाल राठौड़ ने इसी उक्ति को चरितार्थ किया है। उन्होंने दूसरे किसानों को दोमंजिला खेती की राह दिखाई है। किसान भैरुलाल ने बताया, मेरे पास खेती की 5 बीघा जमीन है। इसमें मैं मक्का, गेहूं आदि फसलें उगाया करता था। मोबाइल पर सोशल मीडिया में खेती से जुड़ी जानकारियों वाले जितने भी वीडियो आदि आते थे, उन्हें देखा करता था। इसी दौरान मैंने लौकी की खेती के बारे में जाना। फिर अपना दिमाग लगाया। मैं लगातार इस पर विचार करता रहा कि लौकी की पारम्परिक विधि के अलावा किस तरह सफलता पूर्वक खेती हो सकती है। आखिर मैंने गड्‌ढा विधि के बारे में जानकारी जुटाई। कोटा से ‘अनोखी’ नामक किस्म की लौकी के 100 ग्राम बीज मंगवाए। पूरे पांच बीघा के बजाय मैंने एक बीघा में प्रयोग के तौर पर लौकी लगाई। इसमें सिर्फ 75 ग्राम बीज काम में आए। इसके लिए निश्चित आकार के गड्‌ढे खोदे और हर गड्‌ढे में 4 बीज डाले। मैंने 10 मई से बुवाई शुरू की थी और जुलाई में लौकी आने लगी। इस बीच जब बेलें निकलने लगीं तो गड्‌ढे पर लकड़ी या पिलर गाड़े। इन पिलर पर बेलें चढ़ाकर प्लास्टिक की डोरियां बड़े पेड़ों तक बांध दीं। इन डोरियों के सहारे बेलें तेजी के साथ बढ़ने लगीं और लौकी की अच्छी फसल हुई। भैरुलाल ने बताया, बूंदी जिले में संभवत मैं पहला ऐसा किसान हूं जिसने गड्‌ढा विधि और मचान विधि का प्रयोग कर लौकी की फसल ली है। इससे एक बीघा में 4 महीने में ही लगभग 40 हजार रुपए की आय हुई। इस विधि में बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें दोमंजिला खेती सम्भव है। यानी एक ही खेत में एक ही समय में ऊपर मचान पर लौकी उगा सकते हैं और नीचे जमीन पर दूसरी फसल ले सकते हैं। हालांकि लौकी तोड़ते समय ध्यान रखना पड़ता है कि नीचे लगी फसल नष्ट न हो। किसान राठौड़ ने बताया, मैं जब यह प्रयोग कर रहा था तो कई लोग कौतुक भरी निगाहों से देखते थे। अब प्रयोग सफल रहने पर बंथली सहित आसपास के इलाकों के किसान गड्‌ढा विधि और मचान विधि के बारे में जानकारी लेने आते हैं।

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