भरतपुर जिले के नौगाया निवासी जगन्नाथप्रसाद शर्मा पेशे से शिक्षक हैं। मगर इन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद आराम करने की बजाय जहर मुक्त खेती के लिए अनूठी पाठशाला खोल ली है। वे अब तक सैकड़ों किसानों को जैविक खेती करना सिखा चुके हैं। खुद भी औषधि फसलें, मसाला फसलें, अनाज के साथ फल उत्पादन जैविक पद्धति से कर रहे हैं। वे बताते हैं कि जैविक खेती की यात्रा के पीछे भी एक कारण रहा है।बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर बड़े बेटे राहुल शर्मा के घर वर्ष 2016 में पुत्र हुआ। जन्म के तीन दिन बाद पता चला कि उसके दिल में छेद है और धमनियां सिकुड़ी हुई है। तब डॉक्टरों ने बताया कि आजकल खानपान की चीजों से लेकर मां के दूध में हानिकारक कीटनाशकों की मात्रा पाई जाती है। उस वक्त हमने जैविक खेती करने का तय किया और बेटे की मदद से एक ऑर्गेनिक संस्था शुरू की। फार्म पर केंचुआ खाद और देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन, नीम की पत्तियों इत्यादि से कीटनाशक बनाना शुरू किया। 2019 में पहली बार यही खाद व कीटनाशक इस्तेमाल किए तो फसल अच्छी हुई। रसायन वाले कीटनाशक का खर्चा भी बच गया। धीरे-धीरे हल्दी की खेती, मोरिंगा, ताइवान पिंक अमरूद, कसूरी मैथी, आंवला, काला गेहूं, सोना मोती गेहूं, सेब आदि की खेती करने लगे। इससे न केवल लाखों की कमाई होने लगी बल्कि परिवार का स्वास्थ्य भी सुधरा। वर्ष 2022 में उत्तराखंड से पद्मश्री किसान हरिमन शर्मा के यहां से गर्म इलाकों में होने वाले सेब के 50 पौधे मंगवाए। 2024 से इनसे फल आना शुरू हुए। पहले साल पांच किलो प्रति पौधा ही उत्पादन हुआ लेकिन दूसरे साल 25 और अब 50 किलो के आसपास सेब हो रहे हैं। इनके अलावा अब एक एकड़ में हल्दी व बेर लगे हैं। मोरिंगा के सौ पौधे लगा रखे हैं। 5 प्रजाति के बेर के पौधों के बीच हल्दी की फसल ले रहे हैं। अमरूद के 7 प्रजाति के पौधों के बीच में जैविक खाद बनाने के लिए बेड लगा रखे हैं। खेत के चारों ओर फलों वाले पौधे लगा रखे हैं। एक एकड़ में काले और सोना मोती गेहूं की खेती कर रहे हैं। ब्रजभूमि नाम से एक नर्सरी बनाई है। यहां फल व सब्जियों के पौधे किसानों को उपलब्ध करा रहे हैं। खेत में सोलर ड्रायर सिस्टम भी लगा दिया है। वहां सब्जियों व फलों को सुखाकर उनकी प्रोसेसिंग व पैकेजिंग भी कर रहे हैं। जिसमें हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, कसूरी मैथी पाउडर, आंवला पाउडर शामिल है।


