प्रगतिशील दिव्यांगता पर पहला राष्ट्रीय मंथन जोधपुर में 9 से:देशभर के एक्सपर्ट्स दो दिन करेंगे गंभीर बीमारियों के इलाज व अधिकारों पर मंथन

जोधपुर में 9 और 10 जनवरी को ‘प्रगतिशील दिव्यांगताओं’ (Progressive Disabilities) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस सब्जेक्ट पर पूरे देश में ये पहली कॉन्फ्रेंस होगी। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) के टेपसे-हेप्सन सेंटर और स्वावलंबन फाउंडेशन, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञ जुटने वाले हैं। आयोजकों ने बताया कि यह सम्मेलन बासनी स्थित जगशांति ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा। विशेष बात यह है कि इस आयोजन को भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से स्वीकृति मिल चुकी है। सम्मेलन में भाग लेने वाले पंजीकृत प्रतिभागियों को RCI के मानकों के अनुसार कंटिन्यूइंग रिहैबिलिटेशन एजुकेशन (CRE) पॉइंट्स प्रदान किए जाएंगे, जो पुनर्वास पेशेवरों के लिए करियर में जरूरी होते हैं। एआई और जेनेटिक टेस्टिंग पर रहेगा फोकस सम्मेलन का केंद्रीय विषय “प्रगतिशील दिव्यांगता: अधिकार, हस्तक्षेप और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण” रखा गया है। कार्यक्रम के दौरान तकनीकी और आधुनिक चिकित्सा पर विशेष जोर दिया जाएगा। पहला दिन: विशेषज्ञ प्रगतिशील दिव्यांग व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों और नीतिगत ढांचे पर चर्चा करेंगे। इसमें उपचार के नए तरीकों और परिवारों की भूमिका को सशक्त बनाने पर व्याख्यान दिए जाएंगे। दूसरा दिन: एआई (AI) और स्मार्ट टेक्नोलॉजी आधारित सहायक उपकरणों पर मंथन होगा। साथ ही, जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए बीमारियों की शुरुआती पहचान और समावेशी शिक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। नीति-निर्माण में मिलेगी मदद टेपसे-हेप्सन सेंटर की निर्देशक डॉ. हेमलता जोशी ने बताया कि यह सम्मेलन केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है। डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य नीति-निर्माण और शोध को नई दिशा देना है, जिससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में व्यावहारिक और सकारात्मक बदलाव लाए जा सकें। इसमें वरिष्ठ चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, और नीति-निर्माता एक मंच पर आएंगे। जानें क्या है ‘प्रगतिशील दिव्यांगता’? आसान भाषा में समझें तो ‘प्रगतिशील दिव्यांगता’ (Progressive Disability) शरीर की वह स्थिति है जो समय के साथ ठीक होने के बजाय और गंभीर होती जाती है। लक्षण: इसमें मरीज की मांसपेशियों की ताकत घटने लगती है, चलने-फिरने में दिक्कत होती है और दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भरता बढ़ जाती है। उदाहरण: मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy), पार्किंसन (Parkinson’s), मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS) और हंटिंगटन रोग जैसी बीमारियां इसी श्रेणी में आती हैं।

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