प्रजनन दर घट रही…:अब बुजुर्गों का दौर… 2047 तक मप्र में वृद्धों की संख्या 57 लाख से बढ़कर 1.82 करोड़ हो जाएगी, युवा आबादी बढ़ने की बजाय घटेगी

1999 में बुजुर्गों के लिए बनी मप्र वृद्धजन नीति में 25 साल बाद सुधार की कवायद शुरू हो गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मप्र समेत पूरे देश में प्रजनन दर घटती जा रही है। यानी धीरे-धीरे युवाओं की संख्या घट रही है और जीवन प्रत्याशा बढ़ने से बुजुर्गों की जनसंख्या 2047 तक 1.82 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य नीति आयोग ने अलग-अलग विभागों द्वारा बुजुर्गों को भविष्य में दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर प्लानिंग शुरू कर दी है। आयोग इसका एक ड्राफ्ट तैयार कर रहा है जो सामाजिक न्याय विभाग को भेजा जाएगा। इस ड्राफ्ट में भविष्य के बुजुर्गों के लिए उन अहम बिंदुओं पर प्लानिंग की जा रही है, जो उन्हें बदलते वक्त और परिवेश के अनुरूप सुविधाएं दे सकें। गोल्डन इरा थीम पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए नीति आयोग तैयार कर रहा ड्राफ्ट इन चार बिंदुओं पर काम होगा ऐसा है जनसंख्या का अनुमान
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताजा विश्लेषण के अनुसार 2024 में मप्र के 20 से 29 साल आयुवर्ग के युवाओं की आबादी 1 करोड़ 53 लाख 82 हजार है। 2047 तक इसी कैटेगरी में युवाओं की संख्या 1 करोड़ 49 लाख 93 हजार ही रहेगी। यानी 23 साल बाद युवा आबादी बढ़ने की बजाय कम हो जाएगी। इसके विपरीत 2024 में मप्र के 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 57 लाख 12 हजार है। 2047 तक इसी कैटेगरी में बुजुर्गों की संख्या 1 करोड़ 82 लाख तक पहुंच जाएगी। बुजुर्गों के लिए अभी ये प्रयास रिपोर्ट में 2.0 पर आई प्रजनन दर
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की रिपोर्ट (2019-21) देखें तो मप्र में मौजूदा प्रजनन दर 2.0 है। 2015-16 की रिपोर्ट में ये दर 2.3 थी। यानी युवाओं की संख्या में लगातार कमी आ रही है। इस बीच बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण जीवन प्रत्याशा दर में बढ़ोतरी हो रही है। एजिंग पॉपुलेशन बड़ा मसला होगा
भविष्य में एजिंग पॉपुलेशन एक बड़ा विषय होगा। इसलिए हम कुछ सुझाव तैयार कर शासन को भेज रहे हैं, ताकि इसी आधार पर बुजुर्गों के लिए पॉलिसी बनाई जा सके। – ऋषि गर्ग, सीईओ राज्य नीति आयोग

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