प्रतापगढ़ में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने सार्वजनिक बिजली क्षेत्र के निजीकरण को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। मोर्चा ने कहा-सरकार कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए ज्वाइंट वेंचर, क्लस्टर मॉडल और एचएएम मॉडल के जरिए बिजली उत्पादन, प्रसारण और वितरण निगमों का निजीकरण कर रही है। इसको लेकर भील प्रदेश मोर्चा ने एसडीएम मणिलाल तीरगर को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में बताया- सरकारी बिजली निगम का मुख्य उद्देश्य जनसेवा और राज्यहित है। निजीकरण से यह तंत्र मुनाफा कमाने वाले निजी हाथों में चला जाएगा, जिससे बिजली दरों में भारी वृद्धि की संभावना है। छोटे और मझोले किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी खत्म हो सकती है। निजी कंपनियां बिजली दरें अपने हिसाब से तय करेंगी, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को 10 गुना तक अधिक बिल चुकाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया-सरकार द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर सामान्य मीटर की तुलना में 20-50% अधिक यूनिट दर्ज करते हैं, जिससे बिजली बिल बढ़ेंगे और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। सरकारी बिजली निगमों में रोजगार के अवसर पहले से ही सीमित हैं। निजीकरण के बाद ठेके के आधार पर मजदूरों से 5-8 हजार रुपये में काम कराया जाएगा, जिससे न केवल बेरोजगारी बढ़ेगी, बल्कि आरक्षित वर्गों के लिए नौकरी के अवसर भी खत्म हो जाएंगे। भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा ने कहा-निजीकरण के बाद पिछड़े और गरीब वर्गों को मिलने वाले आरक्षण और सरकारी सुविधाएं खत्म हो जाएगी। बिजली विभाग का निजीकरण होने से हॉस्पिटल, डेयरी प्लांट और छोटे उद्योग भी निजी कंपनियों की शर्तों पर निर्भर हो जाएंगे। मोर्चा ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि सार्वजनिक बिजली तंत्र को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो जनहित में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।


