प्रतापगढ़ शहर में प्राकृतिक नाले की भूमि और उसके बफर जोन में भूखंडों के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच समिति और मौका रिपोर्ट के अनुसार, यह आवंटन सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) और पब्लिक लैंड प्रोटेक्शन सेल (PLPC) द्वारा जारी आदेशों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अनदेखी की गई सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, NGT और PLPC ने नाले व उसके बफर जोन (परिधि क्षेत्र) में किसी भी प्रकार के आवंटन या निर्माण पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया है। इन नियमों की अनदेखी करते हुए नाले की भूमि पर भूखंड आवंटित किए गए थे, जिनकी अनियमितताएं हालिया निरीक्षण में उजागर हुईं। प्रतिबंधित श्रेणी में कुछ क्षेत्र न्यायालयों और NGT के निर्णयों के अनुसार, नाले और उसकी 6 मीटर परिधि (बफर जोन) में किसी भी आवासीय या व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। यह क्षेत्र प्रतिबंधित श्रेणी में आता है, जिससे नीलामी के माध्यम से बेचे गए भूखंडों का उपयोग उनके इच्छित उद्देश्य के लिए संभव नहीं हो पाएगा। अनियमितताओं के बाद, 24 दिसंबर की मौका रिपोर्ट के अनुसार देवगढ़ दरवाजे के बाहर से गलजी कुएं तक प्राकृतिक नाले का राजस्व सीमांकन किया गया। इस रिपोर्ट में पाया गया कि तीनों भूखंड नाले की भूमि और 6 मीटर के बफर जोन में स्थित हैं। नगरीय विभाग के प्रावधानों के तहत, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नाले की भूमि और उसकी 6 मीटर परिधि में किसी भी प्रकार का आवंटन अनुमत नहीं है। निरीक्षण रिपोर्ट आने के बाद हुआ खुलासा नगरीय विभाग के निर्देशों, PLPC के निर्णयों और सुप्रीम कोर्ट व NGT के आदेशों के बावजूद, 24 दिसंबर की निरीक्षण रिपोर्ट ने उजागर किया कि ई-ऑक्शन के माध्यम से 99 वर्षीय लीज होल्ड राइट्स पर बेचे गए तीनों भूखंड नाले की भूमि और उसके 6 मीटर बफर जोन के भीतर हैं। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो गया कि इन मामलों में नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया। इन कमियों के उजागर होने के बाद, नगर परिषद सभापति रामकन्या गुर्जर की अध्यक्षता में आयोजित एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में नगरीय भूमि निष्पादन नियम 1974 के अंतर्गत ई-ऑक्शन से विक्रय किए गए तीनों भूखंडों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।


