प्रतापगढ़ जिले में शनिवार को निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर बसों का संचालन पूरी तरह बंद रखा। प्राइवेट बस एसोसिएशन प्रतापगढ़ के आह्वान पर बस ऑपरेटरों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया और सचिवालय पहुंचकर एक ज्ञापन सौंपा। आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बसों के बंद रहने से आम यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। बस स्टैंड पर परेशान हुए यात्री बसें ठप रहने के कारण प्रतापगढ़ और जिलेभर के बस स्टैंडों पर यात्रियों की भीड़ देखी गई। यात्री निर्धारित समय पर बस स्टैंड पहुंचे, लेकिन बसें नहीं मिलने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा। कई यात्रियों को निजी वाहनों या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ा। शादी-विवाह के सीजन के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी हुई। ये है मांगे निजी बस ऑपरेटरों ने अपने 11 सूत्रीय ज्ञापन में मांग की है कि चुनावों के दौरान निजी बसों का किराया पड़ोसी राज्यों पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश के समान निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही चुनाव ड्यूटी में लगी बसों का टैक्स माफ करने और सामान्य दिनों में भी निजी बसों का किराया पड़ोसी राज्यों के अनुरूप करने की मांग की गई। अन्य मांगों में राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अन्य मार्गों की बसों को ओवरलोड में 25 किलोमीटर के बजाय 50 किलोमीटर की छूट देना, लोक परिवहन सेवा के परमिट की अवधि 10 वर्ष करना, तथा वाहन बदलने और नए आवेदन में तीन वर्ष पुरानी बस की शर्त लागू करना शामिल है। ऑपरेटरों ने स्लीपर कोच और टूरिस्ट बसों पर नया टैक्स केवल AITP परमिट वाले वाहनों पर लागू करने, टीपी की वैधता 24 घंटे करने और उपनगरीय क्षेत्रों में नए रास्ते को जोड़ने की भी मांग की। बस ऑपरेटरों ने सीनियर सिटिजन और महिलाओं को निजी बसों में छूट देने, स्टेज कैरियर बसों से लगेज कैरियर न हटाने, एमनेस्टी योजना लागू करने और बॉडी कोड नियम 153 से पूर्व की बसों को यथावत रखने की मांग भी रखी। यह ज्ञापन प्राइवेट बस संगठन के अध्यक्ष साकिर खान के नेतृत्व में सौंपा गया। बसों के बंद रहने से यात्रियों की परेशानी पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही।


