प्रतापगढ़ के धमोतर दरवाजे के पास नाले की जमीन पर अतिक्रमण का खुलासा हुआ है। ये खुलासा एक नीलामी के दौरान हुआ। राजस्व विभाग की नपती में सामने आया कि 60 फीट चौड़ा नाला अब केवल 25 से 30 फीट का रह गया है। यह मामला अब स्थानीय समस्या से बढ़कर प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक हस्तक्षेप का विषय बन गया है। 4 पटवारियों को सीमांकन के लिए भेजा
शिकायतों के बाद कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने तत्काल राजस्व विभाग को नाले की सीमा जानकारी (नपती) के आदेश दिए। कलेक्टर के निर्देश पर तीन गिरदावर और चार पटवारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन किया। जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि दस्तावेजों में 60 फीट चौड़ा दर्ज नाला जमीन पर अतिक्रमण के कारण लगभग आधा हो गया है। कई जगहों पर मकान और दुकान बनीं
राजस्व टीम की नपती के दौरान यह भी पता चला कि नाले की भूमि पर सैकड़ों स्थानों पर अतिक्रमण किया गया है। यहां पक्के मकान, दुकानें और अन्य निर्माण खड़े कर दिए गए हैं। कई जगह तो नाले की मूल धारा को भी मोड़ दिया गया है, जिससे बरसात के मौसम में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने किया निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्वयं संज्ञान लिया। बांसवाड़ा से चित्तौड़गढ़ जाते समय उन्होंने अपना निर्धारित रूट बदलकर प्रतापगढ़ पहुंचकर नाले का मौके पर निरीक्षण किया। मंत्री ने केवल भौतिक स्थिति का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि पूरे विवाद से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड भी तलब किए। उनका यह कदम दर्शाता है कि सरकार इस प्रकरण को गंभीरता से ले रही है। मंत्री बोले-जनहित के मुद्दों में देरी नहीं होगी बर्दाश्त
निरीक्षण के दौरान मंत्री खर्रा ने दो टूक शब्दों में कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाला विवाद को लेकर दो दिनों के भीतर निर्णय लिया जाएगा और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि जो भी फैसला होगा, वह पूरी तरह जनता के हित को ध्यान में रखकर किया जाएगा, चाहे उसमें कितनी ही सख्ती क्यों न करनी पड़े। इधर प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। कलेक्टर के आदेश पर नाले की नपती का कार्य पूरा हो चुका है और राजस्व विभाग आज अपनी विस्तृत रिपोर्ट तहसीलदार के माध्यम से सौंपेगा। यह रिपोर्ट आगे की
कार्रवाई की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और नाले की मूल चौड़ाई बहाल करने को लेकर कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। आयुक्त को दिए निर्देश
मामले में जिला कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने कहा नाले के समीप जहां-जहां अतिक्रमण है उन्हें नोटिस जारी करने को लेकर नगर परिषद आयुक्त को निर्देश दिए हैं। कुछ अतिक्रमणकारियों का पता नहीं चल रहा है जिसके चलते वहां नोटिस चस्पा किए जाएंगे और वहां विटनेस के साइन होंगे।


