प्रदर्शन के बाद यूनियन का सरकार को 10 मई तक का अल्टीमेटम, नहीं तो बसें डिपो में बंद रहेंगी

भास्कर न्यूज | लुधियाना पंजाब सरकार द्वारा पिछले 6 महीनों से महिलाओं के फ्री सफर की राशि ट्रांसपोर्ट विभाग को न दिए जाने से विभाग गंभीर आर्थिक संकट में आ गया है। इस वजह से पीआरटीसी और रोडवेज के ड्राइवर, कंडक्टर, वर्कशॉप स्टाफ और अन्य कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसके विरोध में 7 मई को पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन 25/11 की ओर से सभी डिपो के गेट पर रैलियां आयोजित की गईं। लुधियाना डिपो की रैली का नेतृत्व डिपो प्रधान संदीप सिंह ने किया। उन्होंने सरकार पर हर मोर्चे पर असफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि कच्चे मुलाजिम पिछले तीन साल से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार केवल मीटिंग कर समय टाल रही है। संदीप सिंह ने बताया कि सरकार को बने तीन साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अब तक एक भी नई बस नहीं खरीदी गई। विभाग को अपने स्तर पर लोन लेकर बसें खरीदनी होती हैं, लेकिन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। उल्टा, निजी कंपनियों की बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत चलाकर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। महिलाओं के अलावा 17 अन्य श्रेणियों को भी फ्री सफर की सुविधा दी जा रही है, लेकिन पैसे की कमी के कारण न तो नई बसें खरीदी जा सकीं और न ही स्पेयर पार्ट्स। परिणामस्वरूप, कई बसें डिपो में खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं। डिपो के जनरल सेक्रेटरी हरशरण सिंह ने बताया कि पंजाब सरकार पर फ्री सफर का करीब 800 से 900 करोड़ रुपए बकाया है, लेकिन बजट में केवल 450 करोड़ का ही प्रावधान किया गया है। अब तक रोडवेज और पीआरटीसी को एक भी रुपया जारी नहीं किया गया। इससे न तो तनख्वाह दी जा सकती है और न ही बसों के लिए जरूरी सामान खरीदा जा सकता है। दोनों विभागों को नई बसों की सख्त जरूरत है। हर बस में 70 से 80 सवारियां होती हैं और ओवरलोडिंग के कारण कई बार बसें अड्डों पर नहीं रुकतीं, जिससे ड्राइवर-कंडक्टर को शिकायतें झेलनी पड़ती हैं। यूनियन ने 10 हजार नई बसों की मांग उठाई है। इससे न केवल परिवहन व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि बेरोजगार युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। यूनियन का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नई बसें चलने से युवा विदेश जाने की बजाय पंजाब में ही रोजगार हासिल कर सकेंगे। यूनियन ने सरकार से ठेकेदारी प्रथा खत्म करने, कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने और विभागों का बकाया पैसा तुरंत जारी करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर 10 मई तक वेतन नहीं दिया गया, तो 11 मई से ‘तनख्वाह नहीं तो काम नहीं’ आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान सरकारी बसें पहले ही समय से डिपो में बंद कर दी जाएंगी। इससे होने वाले नुकसान और आम जनता की परेशानी की पूरी जिम्मेदारी सरकार और मैनेजमेंट की होगी। रैली में करमजीत सिंह, दलजीत सिंह, कोमल और अन्य वर्कर साथी भी उपस्थित रहे। यूनियन ने एकजुट होकर सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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