प्रदेश का नंबर-1 डिपो:वेतन घोटाले के दाग धोकर झुंझुनूं डिपो ने रचा इतिहास, आय, संचालन और यात्री भार में राजस्थान के सभी 52 डिपो को पछाड़ा

राजस्थान रोडवेज के नक्शे पर कभी ‘वेतन घोटाले’ और ‘बड़ी संख्या में निलंबन’ के लिए सुर्खियों में रहने वाला झुंझुनूं डिपो आज प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है। दिसंबर 2025 के आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि यदि प्रबंधन की नीयत साफ हो और कर्मचारियों में टीम वर्क का जज्बा, तो संसाधन नहीं, संकल्प मायने रखता है। झुंझुनूं डिपो ने दिसंबर महीने में आय, किलोमीटर संचालन और लोड फैक्टर जैसे चारों मुख्य पैमानों पर लक्ष्य से कहीं आगे निकलकर राजस्थान में प्रथम स्थान हासिल किया है।
24 निलंबन और 89 लाख का घोटाला जून 2025 में झुंझुनूं डिपो गहरे संकट में था। 89 लाख रुपये के वेतन घोटाले ने डिपो की साख पर बट्टा लगा दिया था और तत्कालीन मुख्य प्रबंधक सहित 24 कर्मचारी निलंबित थे। लेकिन 9 जून 2025 को कार्यभार संभालने वाले मुख्य प्रबंधक गिरिराज स्वामी के नेतृत्व में डिपो ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई। हैरानी की बात यह है कि जब डिपो में 335 कर्मचारी थे, तब प्रदर्शन औसत था। आज 24 कर्मचारियों की कमी के बावजूद महज 300 कर्मचारियों ने वह कर दिखाया। कैसे बदला सिस्टम कठोर निगरानी: रूट पर बसों की रैंडम चेकिंग और टिकट चोरी पर पूर्ण अंकुश।
बेहतर शेड्यूलिंग: जिन रूट्स पर यात्रियों का दबाव अधिक था, वहां बसों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई गई। मेंटेनेंस पर जोर: बसों के ब्रेकडाउन कम किए गए ताकि किलोमीटर खराब न हों। पारदर्शी प्रबंधन: कर्मचारियों का विश्वास जीता और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया। यात्रियों का लौटा भरोसा: ‘प्राइवेट’ छोड़ ‘रोडवेज’ की ओर दिसंबर 2025 में 9 लाख 48 हजार यात्रियों ने झुंझुनूं डिपो की सेवाओं का लाभ उठाया। यात्रियों के अनुसार, अब बसें स्टैंड पर समय पर मिल रही हैं और परिचालकों का व्यवहार भी बदला है। ग्रामीण इलाकों में निजी बसों के मुकाबले रोडवेज की समयबद्धता ने इसे पहली पसंद बना दिया है। यही कारण है कि डिपो ने 101% लोड फैक्टर हासिल किया, जिसका मतलब है कि बसें अपनी क्षमता से भी बेहतर यात्री भार के साथ चलीं। खजाने में रिकॉर्ड बढ़ोतरी मुख्यालय ने झुंझुनूं को दिसंबर के लिए 5.02 करोड़ का लक्ष्य दिया था, लेकिन डिपो ने 5.47 करोड़ की कमाई कर डाली। यानी लक्ष्य से 45 लाख अतिरिक्त। पिछले साल (दिसंबर 2024) की तुलना में यह आय करीब 80 लाख ज्यादा है। प्रति किलोमीटर आय में 4.35 का उछाल रोडवेज जैसे सार्वजनिक उपक्रम के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। आंकड़ों में झुंझुनूं की ‘सुपरफास्ट’ तरक्की डिपो ने न केवल अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि मुख्यालय द्वारा दिए गए कठिन लक्ष्यों को भी बौना साबित कर दिया।

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