इंसानों में होने वाले खतरनाक बीमारियों में भी अब एंटीबायोटिक ‘बेअसर’ होता जा रहा है। एसएमएस और संबद्ध 5 अस्पतालों की ओर से 9776 मरीजों पर किए गए रिसर्च में खुलासा हुआ है कि एंटीबायोटिक का असर 57% से 90% तक कम हो रहा है। एक-दो एंटीबायोटिक में यह 100 फीसदी तक पहुंच गया है। अगर एंटीबायोटिक का ‘अंधाधुंध’ प्रयोग बंद नहीं हुआ तो आने वाले समय में यह और भी खतरनाक होगा। परेशान करने वाली बात यह है कि इन दवाओं का कोई विकल्प भी नहीं है। ऐसे में आगे इलाज में परेशानी आ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्दी-जुकाम या बुखार में भी लोग मनमर्जी से एंटीबायोटिक ले रहे हैं। ऐसे में गंभीर स्थिति में दवा कम या फिर नहीं के बराबर असर कर रही है। एक भी मरीज ऐसा नहीं था जिसे एंटीबायोटिक का 60 प्रतिशत भी असर हुआ हो। सभी 9766 मरीजों में 60 से 98 प्रतिशत तक रेजिस्टेंस आया। इनमें यूरीन इंफेक्शन, निमोनिया और स्किन इंफेक्शन के मामले सबसे अधिक हैं। कुछ मरीजों में रेसिस्टेंस बैक्टीरिया अब रूटीन इंफेक्शन में फैल चुका है। कुछ एंटीबायोटिक का असर बिलकुल खत्म, कई का विकल्प नहीं है बीमारी- संक्रमण वाले बैक्टरिया का नाम
एंटेरोकॉकस एसपी बैक्टीरिया (2000 मरीजों पर रिसर्च) एसकेरिया कोली (4013 मरीजों पर रिसर्च) क्निटोबेक्टर (1766 मरीजों पर रिसर्च) स्टेफिलोकॉकस ऑरियस (326 मरीजों पर रिसर्च) इलाज टेट्रासिलिन 76%
डॉक्सीसिलिन 64%
लीनेजोलिड 98% एरिथ्रोमाइसिन 77%
सिप्रोफ्लोक्सिन 87%
एम्पिसिलिन 63% टाइगेसिसिलिन 97%
एमिकासिन 63%
लमिपेनम 65%
सेफोटेक्साइम 60%
सेफटाजिडिम 79%
एम्पिसिलिन 93% माइनोसाइक्लाइन 57%
सिप्रोफ्लोक्सिन 77%
एमिकासिन 62%
मेरोपेनम 55%
एमिकासिन 62%
इमिपेनम 73%
एमपिसिलिन 65% डॉक्सीसिलिन 93%
टेसोप्लेनिन 97%
एरिथ्रोमाइसिन 70%
क्लिनडेमाइसिन 56%
सिप्रेाफ्लोक्सेसिन 74%
जेंटामिसिन 79%
सेफोक्सिटिन 63%
वेक्नोमाइसिन MIC 100% भास्कर एक्सपर्ट- रजनी शर्मा, एसएमएस माइक्रोबायोलॉजी सामान्य वायरल और एलर्जी में बच्चों को जो एंटीबायोटिक दी जाती है, उनकी वजह से कुछ समय बाद शरीर में उन एंटीबायोटिक के प्रति रेजिस्टेंस बन जाता है। कोविड के बाद इन एंटीबायोटिक का बेहद अधिक उपयोग बढ़ने से अधिक परेशानी हुई है। डब्ल्यूएचओ की ओर से लेसेंट जर्नल में पब्लिश स्टडी के मुताबिक 1.29 मिलियन मौतें एंटीबायोटिक के रेजिस्टेंस की वजह से हो चुकी हैं।
ऐसे में एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें। निर्धारित डोज़ से अधिक नहीं लें। सर्दी-जुकाम में तो इसका उपयोग बिल्कुल नहीं होना चाहिए। “एसएमएस और सम्बद्ध अस्पतालों में एंटीबायोटिक को लेकर मरीजों पर रिसर्च किया है। करीब 10 हजार लोगों की गई रिसर्च की रिपोर्ट दिल्ली भेजी गई थी। अब एंटीबायोटिक के प्रति अवेयरनेस आएगी और इसे रोका जा सकेगा।”
-डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्रिंसिपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज।


