जवाहर कला केंद्र स्थित चतुर्दिक कला दीर्घा में सोमवार को राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट की बहुप्रतीक्षित चार दिवसीय कला प्रदर्शनी ‘प्रभावन’ की शुरुआत हुई। इस अवसर पर वरिष्ठ कलाविद भवानी शंकर शर्मा और नाथू लाल वर्मा ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिकला एवं व्यावहारिक कला के क्षेत्र में अध्ययनरत विद्यार्थियों की 300 से अधिक कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इन कलाकृतियों में नवाचार, पारंपरिक शैलियों का समावेश, सामाजिक सरोकार और कलाकारों की गहन सोच का समृद्ध प्रतिबिंब दिखाई देता है। युवा कलाकारों की रचनाएं उनके तकनीकी कौशल और कलात्मक दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। इस प्रदर्शनी में जहां एक ओर कैनवास पर सजी रंगों की गहराइयां दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, वहीं मिट्टी, धातु, फाइबर और मिश्रित माध्यमों से बनी मूर्तियाँ कला के विविध रूपों को उजागर कर रही हैं। साथ ही, व्यावहारिक कला के अंतर्गत विज़ुअल कम्युनिकेशन, ग्राफिक डिजाइन तथा क्रिएटिव पोस्टर जैसे प्रयोगात्मक कार्यों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा है। यह प्रदर्शनी 11 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक आमजन के लिए दर्शनीय रहेगी। प्रदर्शनी को अधिक संवादात्मक और अनुभवात्मक बनाने के लिए 9 अप्रैल को दोपहर 1 बजे प्रसिद्ध कलाकार महेश कुमावत की ओर से जलरंग (वॉटरकलर) कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात 10 अप्रैल को दोपहर 1 बजे दुर्गेश अटल के निर्देशन में चारकोल कला कार्यशाला का आयोजन होगा। इन कार्यशालाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को लाइव डेमो के साथ कला की बारीकियाँ सीखने का अवसर मिलेगा। साथ ही, पूरे आयोजन के दौरान राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट के विद्यार्थी लाइव पोर्ट्रेट और कैरिकेचर का प्रदर्शन भी कर रहे हैं, जो दर्शकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।


