‘प्रभु को भाव से याद करें, तो होता बेड़ा पार’:संत अमृतराम महाराज ने नाई बाई रो मायरो की कथा सुनाई, श्रद्धालु हुए भाव-विभोर

बाड़मेर शहर के आशीर्वाद भवन में स्थित भगवान शिव एवं राधा कृष्ण मंदिर के प्रथम पाटोत्सव महोत्सव के दूसरे दिन रविवार को नानी बाई का मायरा कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर जोधपुर के संत अमृतराम महाराज के सानिध्य में चल रही तीन दिवसीय कथा के दूसरे दिन कथावाचक नरसी के पिता के श्राद्ध का प्रसंग सुनाते हैं। इस दिन, कथावाचक नरसी की बेटी नानीबाई के मायरे की तैयारी का भी प्रसंग सुनाया। नाई बाई रो मायरो की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। संत अमृतराम महाराज ने प्रवचन में कहा कि ‘कोई तन दुखी तो कोई मन दुखी तो कोई धन बिना रहे उदास। जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आ जावे, लेकिन हर परिस्थिति में प्रभु को भाव से याद किया जावे तो उसका बेड़ा पार है। शरीर की व्याधि, पारिवारिक समस्याएं, आपसी प्रेम भाव का कम होना। इन सभी का इलाज प्रभु का बारम्बार स्मरण ही है। भगवान तो भाव के भूखे है।’ उन्होंने कहा कि किसी के प्रति कोई भेदभाव, मनमुटाव नहीं रखना चाहिए। आप कैसे हो यह सब भगवान जानता है। ऐसे में सच्ची श्रद्धा से प्रभु के सत मार्ग पर चलते हुए अपने जीवन का कल्याण करें। उन्होंने कहा कि भक्त नरसिंह ने संतों को सांवरिया सेठ के नाम की हुण्डी दे दी तो प्रभु ने संतों को भी दर्शन दिए। सुबह के समय गणपति पूजन, दोपहर में शिवजी की आरती उतारी गई। रात को भजन संध्या का आयोजन किया गया। माहेश्वरी पंचायत संस्थान बाड़मेर के अध्यक्ष ओमप्रकाश मेहता ने बताया- 3 फरवरी को सुबह गणपति पूजन, स्थापित देवता पूजन, शाम 5 बजे से माहेश्वरी समाज की नई कार्यकारिणी का दायित्व ग्रहण कार्यक्रम आशीर्वाद भवन में रखा गया। है। वहीं शाम 7 बजे से भोजन प्रसादी का आयोजन माहेश्वरी भवन संख्या 1 व 2 में रखा गया है। उन्होंने आह्वान कि मंदिरों के प्रथम पाटोत्सव व कथा में अधिक से अधिक समाज बंधु भाग ले। इस मौके पर सचिव राधेश्याम मूंदड़ा, ओमप्रकाश चंडक, गिरधारीलाल चंडक, दाऊलाल मूंदड़ा, नारायणदास राठी, पुखराज तापड़िया, नारायणदास मुथा, हंसराज बिड़ला, माहेश्वरी महिला मंडल अध्यक्ष मंजू बिड़ला, सुशीला मेहता, शोभा मूंदड़ा, बसंती चंडक, रामकिशोर बिड़ला, रामेश्वर तापड़िया, हंसराज धूत, भरत मूंदड़ा, अशोक मूथा, रतन फोफलिया, अशोक डागा, भीमराज पूंगलिया, श्यामलाल राठी, ताराचंद बिड़ला, मोहनलाल, धूत, जगदीश तापड़िया,सहित समाज बंधु उपस्थित रहे।

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