भास्कर न्यूज|गुमला जिले में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। घाघरा अंचल अंतर्गत आदर पंचायत के सलगी गांव में वन भूमि पर की जा रही अफीम की अवैध खेती पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे पूरी तरह जमींदोज कर दिया है। उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित को मिली गुप्त सूचना के बाद यह त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की गई। उपायुक्त के निर्देश पर 30 जनवरी की शाम प्रशासन और पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित की गई। इस टीम में अंचल अधिकारी सुशील खाखा, थाना प्रभारी मोहन सिंह और फॉरेस्टर राम शेखर शामिल थे। टीम ने सलगी गांव के दुर्गम वन क्षेत्र में अचानक छापेमारी की। मौके पर पहुंचते ही अधिकारियों ने देखा कि लगभग 65 डिसमिल भूमि पर अफीम की लहलहाती फसल खड़ी थी, जिसे गुपचुप तरीके से वन विभाग की जमीन पर उगाया गया था। अवैध खेती की पुष्टि होते ही अधिकारियों ने बिना समय गंवाए मौके पर ही अफीम की पूरी फसल को नष्ट कर दिया। क्योंकि यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन आता है, इसलिए जिला प्रशासन और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी में पूरी खेती को ट्रैक्टर व अन्य साधनों से नष्ट कर दिया गया ताकि इसका पुन: उपयोग न हो सके। अंचल अधिकारी सुशील खाखा ने बताया कि प्रशासन इस अवैध कृत्य में शामिल मुख्य नेटवर्क को खंगाल रहा है। उन्होंने कहा अवैध खेती में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान की जा रही है। इस वर्ष झारखंड में नशा मुक्त अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई हुई है। इसके पहले घाघरा सहित गुमला जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में सैकड़ों एकड़ अफीम की फसल नष्ट की गई है। वर्ष 2022-23: इस दौरान घाघरा के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में एसएसबी और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से कम से कम 3-4 बड़े अभियान चलाए थे। वर्ष 2021 में कोविड के बाद के समय में इन क्षेत्रों में अफीम की खेती में बढ़ोतरी देखी गई थी, जिसे नष्ट करने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल शुरू हुआ।


