चंद्राकर- बताएं कौन अफसर दोषी, क्या कार्रवाई की?
स्वास्थ्य मंत्री- सूली पर लटकाने का हक मंत्री को नहीं विधानसभा में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन(सीजीएमएससी) में रीएजेंट खरीदी के मामले में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने अपनी ही सरकार के स्वास्थ्य मंत्री को घेरा। प्रश्नकाल में चंद्राकर ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर दोषी अफसरों के नाम बताने का दबाव बनाया। इस पर मंत्री ने ईओडब्लू की जांच का हवाला दिया। इस पर चंद्राकर भड़क गए। तब मंत्री बोले- 15 अधिकारियों का नाम ईओडब्लू को दे दिया है। मंत्री को यह अधिकार नहीं है कि जांच करके उसको सूली पर लटका दे। पढ़िए दोनों के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला… चंद्राकर- रीएजेंट खरीदी के संबंध में मोक्षित एजेंसी द्वारा सप्लाई सामग्रियों के टेंडर, मांग पत्र पर किस अधिकारी द्वारा कौन सी सामग्री कब किस दर सप्लाई की गई?
मंत्री- 795 पेज और 492 पेज की जानकारी दे दी गई है। मोक्षित कार्पोरेशन को 2019-20 से 2022-23 तक 266 प्रकार के रीएजेंट सामग्री, कुल 453 करोड़ की खरीदी की गई। चंद्राकर- मैंने यह प्रश्न नहीं किया है। डीएचएस ने मांग पत्र कितनी सामग्री का दिया और उस पर कितनी राशि उपलब्ध कराई गई। सामग्री कितने दिनों में सप्लाई हुई?
मंत्री- 2020-21 में मोक्षित कार्पोरेशन द्वारा रिएजेंट सामग्री भी खरीदे और उपकरण भी खरीदे थे। आपको दोनों बताऊं। चंद्राकर – आप उत्तर दीजिए। मैं फिर आपसे प्रश्न पूछ लूंगा। आप मुझसे प्रश्न मत करिए।
मंत्री – 2020-21 में 10 प्रकार के उपकरण खरीदे, जिसमें उपकरणों की संख्या 256 थी, उसको 11 करोड़ 20 लाख रुपए का क्रय आदेश दिया गया था। उसको 11 करोड़ 20 लाख रुपए का भुगतान हुआ। 2021-22 में दो प्रकार के उपकरण थे और उपकरणों की संख्या 41 थी। 3 करोड़ 15 लाख रुपए का क्रय आदेश दिया गया और पूरा भुगतान हुआ। 2022-23 में 8 प्रकार के उपकरण थे, उपकरणों की संख्या 1846 थी, 83 करोड़ 82 लाख रुपए का भुगतान हुआ। 2023-24 में 22 प्रकार के उपकरण में से 10 प्रकार के उपकरण खरीदे गए। 81 लाख की खरीदी हुई और उसका भुगतान अभी शेष है। इसी प्रकार रिएजेंट की खरीदी हुई। 2023 में 249 प्रकार के रिएजेंट की खरीदी हुई, उसको 385 करोड़ रुपए का क्रय आदेश दिया गया, उसमें मात्र 47 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ। 338 करोड़ रुपए देना शेष है। इससे पहले 2019-20 तक के सभी क्रय आदेशों का भुगतान हो चुका है। चंद्राकर – प्रकरण में क्या अनियमितता पाई गई, किन अनियमितताओं की जांच हो रही है?
मंत्री- इस प्रकरण में जैसे ही प्रदेश में विष्णुदेव साय की सरकार बनी और समाचार पत्रों से पता चला कि अनियमितता हो रही है। हमने 12 जनवरी 2024 को इसकी विभागीय जांच के आदेश दे दिए। चंद्राकर – क्या भुगतान के लिए पैसा उपलब्ध नहीं था तो भी आपने खरीदा?
मंत्री – जितना पैसे का प्रावधान था, उससे ज्यादा की खरीदी हुई। चंद्राकर – कितने की खरीदी हुई।
मंत्री- 2024-25 में 120 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान था, उसमें 108 करोड़ रुपए आवंटन प्राप्त हुआ। 385 करोड़ का क्रय आदेश दिया गया। चंद्राकर- सीजीएमएससी या स्वास्थ्य विभाग के किस नियम में ऐसा है। पैसा नहीं है तो खरीदा जा सकता है क्या। किसने खरीदी की और किसके खिलाफ क्या कार्रवाई कर रहे हैं?
मंत्री- हमने ईओडब्ल्यू जांच का आदेश दे दिया और इसमें हमने 15 अधिकारियों के खिलाफ एनओसी दिया है। इससे बृहद क्या हो हो सकता है। जो आरोपी है, जिसने फर्जी किया है, वह अभी जेल में है। इससे बड़ी कार्रवाई क्या हो सकती है। सरकार आने के साथ हमने एक महीने में जांच कराई। चंद्राकर – भाषण नहीं, प्रश्न का उत्तर दीजिए।
मंत्री- मैं प्रश्न का ही उत्तर दे रहा हूं। यह मामला बृहद है। चंद्राकर- कुछ मात्रा 385 करोड़ नहीं हो सकती। मंत्री- चूंकि यह 385 करोड़ का मामला था इसलिए हमने विभागीय जांच करवाई और जांच में पता चला कि जांच करने वाले ही इसमें मिले हुए हैं। हमने इस पूरे मामले को उठाकर ईओडब्ल्यू को हस्तांतरित कर दिया। चंद्रकार- जिन अफसरों के नाम आपने ईओडब्ल्यू में दिए हैं, उनका नाम सार्वजनिक कर दें।
मंत्री- 15 अफसर हैं इसमें दो बड़े अफसर हैं। चूंकि ईओडब्ल्यू में जांच चल रही है, शायद सदन में इनका नाम बताना उचित नहीं होगा। चंद्राकर- सप्लाई करने वाले ने क्या गड़बड़ी की है, जिसके खिलाफ ईओडब्ल्यू में गए हैं ?
मंत्री- सप्लाई कर्ता और सप्लाई करने में जिन अफसरों कर्मचारियों का हाथ था, उन सबके खिलाफ हमने ईओडब्ल्यू में नाम दिया है। सप्लाई कर्ता की गड़बड़ी यह थी कि जिस चीज का रेट 100 रुपए है उसे 10 गुना, 8 गुना रेट में खरीद लिया गया। दूसरा, नियम यह है कि रिएजेंट जांच चालू होने के बाद भुगतान होता है। अभी भी 700 से ऊपर मशीनें हैं, आज तक चालू नहीं हो पाई हैं। तीसरी चीज, ये क्लोज मशीन है, जिसमें दूसरे का रिएजेंट नहीं लगता है और उसने छद्मपूर्वक ओपन मशीन भी दे दिया, जिसमें किसी की भी दवाईयां लगती हैं। कुल मिलाकर यह सप्लायर और अफसरों की सांठ गांठ से हुई है।


