राज्य के चर्चित 2161 करोड़ के शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा 11 अप्रैल तक ईओडब्ल्यू की रिमांड पर रहेंगे। वे 2 अप्रैल से ईओडब्ल्यू की रिमांड पर है। रिमांड की अवधि समाप्त होने पर उन्हें सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया था। साथ ही पूछताछ हवाला देकर उन्हें फिर रिमांड पर मांगा। कोर्ट ने ईओडब्ल्यू का मांग स्वीकार कर ली। पता चला है कि लखमा पूछताछ में पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रहे हैं। वे अधिकांश सवालों का एक ही जवाब दे रहे हैं कि उन्हें जानकारी नहीं या पता नहीं है। इस बीच ईओडब्ल्यू की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि घोटाले के कमीशन का पैसा हर माह बस के माध्यम से आबकारी अधिकारी सुकमा भिजवाया करते थे। बस का कर्मचारी पैसों का पार्सल पूर्व मंत्री लखमा के घर पर छोड़ता था। ईओडब्ल्यू उन बसों के अलावा उनके मालिकों, ड्राइवर और पार्सल छोड़ने वालों तक पहुंच गई है। सभी का बयान दर्ज किया गया है। बस में नोटों का पार्सल चढ़ने वाले से भी पूछताछ हुई है। उसे सरकारी गवाह बनाया गया है। ईओडब्ल्यू का दावा है कि शराब घोटाला की पूर्व मंत्री लखमा को पूरी जानकारी थी। उनकी सहमति से पूरा सिस्टम ऑपरेट हो रहा था। इसके लिए उन्हें हर माह 2 करोड़ रुपए का कमीशन मिलता था। जिला आबकारी अधिकारी इकबाल अहमद ने स्वीकार किया है कि हर माह कमीशन के तौर पर 50 लाख रुपए पूर्व मंत्री को देते थे। जेल में बंद तत्कालीन आबकारी सचिव आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी ने कहा है कि अनवर ढेबर के माध्यम से डेढ़ करोड़ रुपए हर माह तत्कालीन मंत्री को दिए जाते थे लखमा के तत्कालीन ओएसडी जयंत देवांगन ने भी कहा कि आबकारी सब इंस्पेक्टर कन्हैया कुर्रे के माध्यम से कमीशन का पैसा आता था, जो मंत्री तक पहुंचता था। इस तरह से लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपए मिलते थे। दस्तावेजों में भी लखमा के दस्तखत हैं। पूर्व सीएम की भूमिका की हो रही जांच : ईओडब्ल्यू तत्कालीन मंत्री लखमा के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल की भूमिका की जांच कर रही है। उनके संबंध में लगातार पूछताछ की जा रही है। चर्चा है कि दिल्ली आबकारी घोटाला की तरह छत्तीसगढ़ में कार्रवाई की तैयारी है।


