प्रिंसेज ऑफ वेल्स अस्पताल में महिला सुरक्षा और सुविधाओं की कमी

अमृतसर आजादी से पहले बना प्रिंसेज ऑफ वेल्स जनाना अस्पताल (अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर) बदहाली का शिकार है। यहां इलाज के लिए आने वाली महिलाओं और महिला स्टाफ को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में सरकार की ओर से एक ओट सेंटर चलाया जा रहा है। यहां रोजाना करीब 200 नशे के मरीज दवा लेने आते हैं। स्टाफ का कहना है कि ये मरीज अस्पताल में दिनभर घूमते रहते हैं। महिला मरीजों और स्टाफ को घूरते हैं। भद्दे इशारे करते हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्टाफ ने बताया कि यह अस्पताल गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए है। यहां अधिकतर महिलाएं ही आती हैं। ऐसे में नशे के मरीजों की मौजूदगी से माहौल खराब हो रहा है। स्टाफ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अस्पताल में सुरक्षा गार्ड तक तैनात नहीं हैं। सिविल सर्जन कार्यालय को कई बार पत्र भेजे गए। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्टाफ के मुताबिक, अस्पताल से महज 500 मीटर की दूरी पर दो ओट सेंटर चल रहे हैं। जबकि यह काम एक ही सेंटर से भी हो सकता है। बेरी गेट पर पहले से एक ओट सेंटर मौजूद है। इसके बावजूद महिला अस्पताल में दूसरा सेंटर खोल दिया गया। अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं भी पूरी नहीं हैं। एक्सरे मशीन तो है, लेकिन उसकी फिल्म नहीं है। मरीजों को कंप्यूटर से तस्वीर निकालकर व्हाट्सएप पर रिपोर्ट भेजनी पड़ती है। कई बार स्टाफ को अपनी जेब से खर्च कर मरीजों को जरूरी सुविधाएं देनी पड़ती हैं।सफाई व्यवस्था भी खराब है। स्टाफ ने बताया कि उन्होंने अपनी जेब से एक महिला सफाईकर्मी रखी है। वह सिर्फ लेबर रूम, वार्ड और स्टाफ ऑफिस की दिन में एक बार सफाई करती है। विभाग की ओर से न तो सफाईकर्मी दिए गए हैं और न ही कोई स्थायी समाधान किया गया है। चोरी की घटनाएं भी हो चुकी हैं। अस्पताल से बेड, खिड़कियां और अन्य सामान चोर ले जा चुके हैं। अब नशेड़ियों की वजह से डॉक्टर और स्टाफ और ज्यादा परेशान हैं।

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