भास्कर न्यूज | कवर्धा प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में तालमेल की कमी ने स्टूडेंट्स, अभिभावकों और शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल और समग्र शिक्षा तीनों कार्यालय एक ही विभाग के अंतर्गत हैं। इसके बावजूद तालमेल की कमी है। इसका खामियाजा सीधे कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों और उनके शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने इस सत्र 2025-26 में 1 से 20 जनवरी 2026 तक प्रायोगिक और प्रोजेक्शन परीक्षा कराने का निर्देश दिया। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर ने 15 जनवरी तक 10वीं और 12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का आदेश जारी कर दिया। छग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश कुमार चंद्रवंशी का कहना है कि प्रायोगिक परीक्षा के बीच प्री-बोर्ड का आयोजन विद्यार्थियों की तैयारी और पढ़ाई दोनों को बाधित करेगा। अभी अधिकांश स्कूलों में केवल 80- 85 प्रतिशत पाठ्यक्रम ही पूरा हुआ है। शेष पाठ्यक्रम की पढ़ाई जनवरी में पूरी होगी। ऐसे में प्री-बोर्ड परीक्षा का आयोजन छात्रों को असमय परीक्षा में फंसाएगा। अर्धवार्षिक परीक्षा की गड़बड़ी: कबीरधाम जिले में अर्धवार्षिक परीक्षा शीतकालीन अवकाश के पहले पूरी नहीं हो पाई। डीईओ कार्यालय ने समय-सारिणी में संशोधन कर इसे 1 से 5 जनवरी तक कर दिया। इसके कारण प्रायोगिक और प्रोजेक्शन परीक्षा का संचालन शुरू नहीं हो पाया। इस विलंब ने छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए असुविधा और तनाव बढ़ा दिया। 10वीं-12वीं की वार्षिक परीक्षा 10 दिन पहले दसवीं और बारहवीं की वार्षिक परीक्षा सामान्यतः 1 मार्च से शुरू होती थी। लेकिन इस वर्ष 20 फरवरी से प्रारंभ होगी। एसोसिएशन का कहना है कि ऐसे में छात्रों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। यह निर्णय विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ है और शिक्षा प्रणाली में असंगति दिखाता है। इस वर्ष ऑनलाइन कार्यों में अचानक वृद्धि ने शिक्षकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बताया गया कि कई शिक्षक कक्षा में पढ़ाई नहीं करा पा रहे। वहीं एसआईआर ड्यूटी में वृद्धि ने स्कूलों में नियमित पढ़ाई को प्रभावित किया है। इससे रिजल्ट पर असर पड़ सकता है।


