प्लांट की जियोलॉजिकल लोकेशन भी जल प्रदूषण का बड़ा कारण:रामकी से निकलने वाला दूषित लाल पानी बेटमा तालाब व इंदौर के यशवंत सागर तक पहुंच रहा

पीथमपुर के तारपुरा गांव में रामकी इनवायरो प्लांट से निकलने वाला दूषित पानी यशवंत सागर व बेटमा तालाब को भी प्रदूषित कर रहा है। भास्कर एक्सपर्ट सुधींद्र मोहन शर्मा ने इसरो के जियो प्लेटफार्म भुवन पोर्टल से पीथमपुर की वाटर चैनल की स्टडी की। भारत सरकार द्वारा पेयजल स्रोत के लिए बनाए मैप से स्थापित हुआ कि रामकी प्लांट से निकलने वाला पानी गंभीर नदी के कैचमेंट से यशवंत सागर व बेटमा तालाब तक जा रहा है। एक्सपर्ट का कहना है, प्लांट की लोकेशन भी गलत है, जिससे भूजल व तालाब दोनों खराब हो रहे हैं।
वेदर्ड बेसाल्ट रॉक पर है रामकी प्लांट, जिससे वेस्ट जमीन में उतर रहा एक्सपर्ट के मुताबिक पीथमपुर में रामकी प्लांट वेदर्ड बेसाल्ट रॉक पर स्थित है। यह ऐसा पत्थर होता है, जिस पर धूप, पानी और मिट्‌टी का सीधा असर होता है। इस रॉक पर छोटे-छोटे गोल टुकड़े बन जाते हैं, जिनमें काफी गैप होता है। इसी से प्लांट के लैंड-फिल का लिचेट (प्रोसेस करने के बाद का गाढ़ा पेस्ट) धीरे-धीरे भूजल में तो जाता ही है, ऊंचाई पर होने के कारण आसपास के नदी और तालाब को भी खराब करता है। रामकी की तरफ से बात करने वाले अधिकारियों का कहना है कि लैंड-फिल के लिए मोटी काली पन्नी की लेयर बनाई जाती है। इसे जियो-टैक्सटाइल कहते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक यह प्लास्टिक यूनियन कार्बाइड जैसे घातक वेस्ट को नहीं रोक सकता। इसके लिए जरूरी है कि प्लांट को हार्ड बेसाल्ट रॉक पर ही स्थापित किया जाए।

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