निगम की 16 में से 9 ट्रैक्टर ट्रालियों के जरिए 8 किलोमीटर लंबी लाइट वाला चौक से ढांगू पीर तक 2.5 किलोमीटर लंबी रोड, पीर बाबा चौक से ढाकी चौक तक 2.3 किलोमीटर, खानपुर चौक से वाल्मीकि चौक तक 1.8 किलोमीटर रोड, गाड़ी अहाता, मेन बाजार तक आधा किलोमीटर रोड पर दुकानों का कूड़ा उठाने की जिम्मेदारी है। इसी तरह से आटो और हुप्पर की 2 वार्डों में कूड़ा लिफ्टिंग के लिए जाते हैं, जिन्हें ढाई लीटर डीजल-पेट्रोल रोजाना दिया जाता है जबकि घर से कूड़ा उठाने के लिए हरेक वार्ड में 150 रिक्शा दिए गए हैं। संकरी गलियां में आटो के न जा पाने की वजह से रिक्शा भेजा जाता है, लेकिन वहां पर भी दूसरे दिन ही कूड़ा उठ रहा है। गाड़ी अहाता चौक के पास निगम की ओर से ब्यूटीफाई किया गया एरिया। जहां कभी कूड़े के ढेर लगते रहे हैं। भास्कर न्यूज । पठानकोट स्वच्छ सर्वेक्षण-2025 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके तहत शहर की सड़कों पर इधर-उधर कूड़ा बिखरने की बजाए एक ही जगह गीला-सूखा कूड़ा डालने के लिए शहर में 150 जगह डस्टबिन लगाए जाएंगे। इस पर 6 लाख 30 हजार रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए जिला प्लानिंग बोर्ड की ओर से निगम को फंड मुहैया कराया गया है। अगले दो महीने में लोकेशन तय कर हरे और नीले रंग के दो अलग-अलग डस्टबिन सड़कों के किनारे लगे नजर आएंगे। इससे नौ साल पहले भी निगम ने सड़कों पर 50 जोड़ी डस्टबिन रखवाए थे, लेकिन कई चोरी हो गए और कई जगह पर टूट गए। एक्सईएन परमजोत सिंह ने बताया कि प्लानिंग बोर्ड से उसके लिए फंड दिया गया है, उससे 150 जोड़ी डस्टबिन परचेज करने के लिए टैंडर कॉल किए गए हैं, लोकेशन बाद में तय होंगी। इसके लिए पब्लिक व्यू लिया जाएगा और वहां पर डस्टबिन रखवा दिए जाएंगे। ऐसा नहीं कि कहीं डस्टबिन लगवा दिए जाएं और बाद में लोग उन्हें हटवाने के लिए निगम में शिकायत लेकर आते रहें। निगम ने 2017 में स्वच्छता सर्वेक्षण के दूसरे संस्करण में शहर में घर-घर गीला और सूखा कूड़ा इकट्ठा करने के लिए हरा और नीले रंग के दो डस्टबिन देने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उसे बदलकर शहर की सड़कों पर दो डस्टबिन लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके तहत शहर के गांधी चौक, डाकखाना चौक और ढांगू रोड पर 50 जोड़ी डस्टबिन लगाए गए थे ताकि लोग कूड़े को सड़कों पर फेंकने की बजाए रोड पर फेंकें। वहीं पिछले 9 साल में शहर की सड़कों पर कूड़ा गायब नहीं हुआ है, बल्कि निगम की ओर से लगाए गए डस्टबिन ही गायब हो गए। अधिकारियों के मुताबिक कई जगह पर डस्टबिन टूट गए थे और कई जगह पर रात के समय उन्हें चोरी कर लिया गया। निगम के हेल्थ अफसर व एसडीओ पंकज कहते हैं कि सड़कों पर डस्टबिन लगने के फायदे हैं। निगम की ओर से डस्टबिन लगवाने के लिए बाद उससे गंदगी निकालने के लिए मॉनिटरिंग की जाएगी जबकि अपने शहर को साफ रखने में आम लोगों को भी आगे आना होगा। जब आप घर से सामान खरीदने बाजार जाते हैं तो कूड़ा डस्टबिन में ही डालें। इससे कूड़ेदान के आसपास साफ-सुथरा रहेगा। इससे लोग कूड़ेदान के नजदीक जाकर उसमें कूड़ा डालेंगे।


