प्लेन का सपना, टॉपर बने बच्चे:छत्तीसगढ़ के मुसुरपुट्‌टा गांव में 12 साल से 10वीं-12वीं के टॉपर्स को जहाज से घुमा रहे गांव वाले

छत्तीसगढ़ के दुधावा क्षेत्र के मुसुरपुट्‌टा गांव के लोगों ने हवाई जहाज से सैर कराने का सपना दिखाकर गांव के बच्चों को पढ़ाई में बेहतर बना दिया। अब गांव के ज्यादातर बच्चे दसवीं और बारहवीं प्रथम श्रेणी में पास हो रहे हैं। करीब 1900 की आबादी वाले मुसुरपुट्‌टा गांव में 12 साल पहले 2013 में गांव के टॉपर्स को हवाई जहाज से सैर कराने की योजना बनी ताकि गांव में पढ़ाई का माहौल बने। इस अनोखी योजना का संचालन गांव के ही शासकीय सेवा में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों ​ने मिलकर किया। योजना के संस्थापक सदस्य शिक्षाविद धनराज भास्कर ने बताया कि गांव के बहुत से लोग शासकीय सेवाओं में हैं, जो इसका सारा खर्च उठाते हैं। पहले इस योजना से गांव से निकले 15 शासकीय अधिकारी-कर्मचारी जुड़े थे। अब यह संख्या 110 हो गई है, जिनमें डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम, शिक्षक, पुलिसकर्मी, सेना के जवान, क्लर्क सब हैं। दीपावली पर गांव के सभी अधिकारी एकत्र होते हैं। दीप मिलन समारोह के दौरान अगले साल की योजना पर चर्चा करते हैं। योजना के तहत अब तक 48 छात्रों को हवाई यात्रा कराई जा चुकी है। इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं के टॉपर्स तोषण कुमार साहू (कक्षा 10वीं, 93 प्रतिशत), डेविड कुमार साहू (कक्षा 10वीं, 91 प्रतिशत) तथा तरन कुमार साहू (कक्षा 12वीं, 89 प्रतिशत) को रायपुर से भुवनेश्वर की हवाई यात्रा कराई गई। तीनों छात्रों के लिए यह जीवन की पहली उड़ान थी। छात्रों ने बताया हमारे लिए हवाई जहाज में बैठना सपने जैसा था। अब तो छात्रों के साथ गांव के दूसरे लोग भी अपने खर्चे पर उनके साथ घूमने जाने लगे हैं। गांव का कोई बच्चा राज्य में टॉप-10 में आया तो विदेश घुमाएंगे गांव के अधिकारी-कर्मचारियों के समूह ने तय किया है कि यदि गांव का कोई छात्र प्रदेश में टॉप-10 में आता है तो उसे विदेश घुमाएंगे। इस घोषणा से बच्चों में पढ़ाई को लेकर उत्साह और बढ़ गया है। असर… यात्रा से छात्रों को एक्सपोजर मिलता है
धनराज कहते हैं- हवाई यात्रा को लेकर छात्रों में रोमांच तो रहता ही है। सैर करने से उन्हें एक्सपोजर भी मिलता है। महानगर की संस्कृति, जीवनशैली, विविधता को नजदीक से देखने का अवसर मिलता है। यह यात्रा केवल भ्रमण नहीं बल्कि छात्रों के जीवन में आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव होती है। छात्रों ने कहा पहली बार छत्तीसगढ़ से बाहर जाकर उन्होंने नए परिवेश को देखा और यह समझा कि दुनिया में बहुत सारी संभावनाएं हैं। इस पहल से प्रसन्न माता-पिता ने कहा बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना जागृत हुई है।

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