भास्कर एक्सक्लूिसव राज्य के 12 जिले में सरकार ने सितंबर 2024 में मोबाइल मेडिकल यूनिट शुरू किया था। इनमें गिरिडीह और जमशेदपुर को छोड़कर 10 जिले बोकारो, रांची, गुमला, हजारीबाग, खुंटी, लोहरदगा, रामगढ़, सरायकेला, सिमडेगा, वेस्ट सिंहभूम बंद हो गए। इन जिलों में 80 मोबाइल मेडिकल यूनिट हैं, जो पिछले तीन महीने से फंड के अभाव में बंद पड़े हैं। इन सभी जिलों के स्वास्थ्य महकमे की एजेंसी के साथ एमओयू हुआ था। बोकारो जिले के चास, चंदनकियारी और जरीडीह प्रखंड के लिए पांच मोबाइल मेडिकल यूनिट चालू किए गए थे। उसी आधार पर ये पांचों यूनिट संचालित थे। मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने का कारण संस्था के पास फंड का अभाव बताया जा रहा है। मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने से प्रतिमाह प्रत्येक जिले के सुदूर इलाकों में रहने वाले करीब 10 हजार लोगों का इलाज बंद हो गया है। घर तक पहुंचकर नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा देने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना फिलहाल ठप हो गई है। इस योजना से वैसे मरीजों का इलाज किया जा रहा था, जो अस्पताल भी नहीं पहुंच पाते हैं। अब ऐसे मरीजों को 250-500 रुपए खर्च कर निजी क्लीनिक या सदर अस्पताल आना पड़ रहा है। इसके अलावा अनुमंडलीय अस्पताल चास में नवजात बच्चों के लिए बना न्यू बेबी बोर्न यूनिट भी पांच महीने से बंद है। यहां अनियमित बिजली और कई अन्य तकनीकी गड़बड़ियां हैं। इस वजह से यहां बच्चों का जन्म के समय परेशानी होने पर सदर अस्पताल बोकारो में रेफर कर दिया जाता है। प्रत्येक माह 12-15 बच्चों को रेफर किया जाता है। मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों को हो रही है। चूंकि दूर दराज के मरीजों को मुफ्त में इलाज और जांच के लिए लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंचने में 500 से 700 रुपए तक भाड़ा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण बुजुर्ग इलाज कराने के लिए लंबा सफर कर सरकारी अस्पताल या निजी क्लीनिक में जा रहे हैं। वहीं प्रसव के लिए महिलाओं को निजी क्लीनिक में ले जाते हैं। ताकि जन्म के बाद बच्चों को परेशानी न हो। फंड मिलते ही फिर चालू होगी मोबाइल सेवा : प्रबंधक हंस फाउंडेशन के प्रबंधक सुमित कुमार ने कहा कि फंड आने के बाद बोकारो में फिर से मोबाइल मेडिकल यूनिट चालू कर दिया जाएगा। इसका रूट चार्ट नवंबर महीने में मिला था, उसी रूट चार्ट के आधार पर अप्रैल तक पांचों यूनिट का संचालित हो रहा था। अब यहां पर जब भी चालू होगा, तो इसके लिए रूट चार्ट फिर से लेना पड़ेगा। फंड देने का मामला जिला ऑफिस का नहीं है : सीएस अनुमंडलीय अस्पताल चास में खड़ी मोबाइल मेडिकल यूनिट की वैन।


