फरवरी में सबसे अधिक 17 विवाह के हैं मुहूर्त, 15 मई से 17 जून तक मलमास

सिटी रिपोर्टर | बोकारो प्रेम, वैवाहिक सुख और मंगल कार्यों का मुख्य कारक शुक्र तारा 31 जनवरी को पश्चिम दिशा से उदित हो गया है। इससे शुक्र ग्रह अपने बल पर उदित होकर मंगल कार्यों को समर्थन दे रहा है। इसके साथ ही शुभ मांगलिक कार्य शुरू हो गया। इसके बाद शहनाई की गूंज, जनेउ, मुंडन, भूमि पूजन, गृहप्रवेश और भूमि-भवन की खरीदारी आदि में तेजी आ गई है। विवाह लग्न आज से शुरू हो गया है। फरवरी म​हीने में सबसे अधिक 17 शुभ वैवाहिक मुहूर्त हैं। शुक्र ग्रह 11 दिसंबर को अस्त हुआ था। जब शुक्र अस्त रहता है तो विवाह, गृह प्रवेश और विवाह-संबंधी अन्य शुभ कार्यों का मुहूर्त नहीं निकलता है। ज्योतिषाचार्य स्वाधीन झा ने बताया है कि 31 जनवरी को शुक्र तारा का अस्त समाप्त होते ही यह ग्रह फिर से आकाश में उदय हो गया और इसी के साथ शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। 2026 के वैवाहिक मुहूर्त बनारसी पंचांग के अनुसार फरवरी के 4, 5, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 19, 20, 21, 24, 25, 26 मार्च में 2, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14 तक है। जबकि मिथिला पंचांग के मुताबिक फरवरी के 5, 6, 8, 15, 19, 20, 22, 25, 26, मार्च के 4, 9, 11, 13, अप्रैल के 17, 20, 26, 30, मई के 1, 6, 8, 10, 13, जून के 19, 24, 25, 26, 28, 29 व जुलाई के 1, 2, 3, 6, 9, 12 को शुभ मुहूर्त है। इस साल 14 मार्च से 14 अप्रैल तक लगेगा पहला खरमास इस साल ज्येष्ठ मास दो महीने रहेगा। वर्ष 2026 में विवाह के लिए सबसे ज्यादा लग्न-मुहूर्त फरवरी में है। 4 से 26 फरवरी तक कुल 17 मुहूर्त हैं। इसके बाद मार्च में 12, अप्रैल में 4, मई में 4, जून में 6 और जुलाई में भी 6 मुहूर्त हैं। फिर पांच महीने के चातुर्मास के बाद नवंबर में 4 व दिसंबर में 7 शुभ मुहूर्त हैं। इस वर्ष का पहला खरमास 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा। शास्त्रीजी के अनुसार चैत्र कृष्ण एकादशी में 14 मार्च की देर रात 3.07 बजे सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास शुरू हो जाएगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शादी-विवाह में शुभता आवश्यक है। इसके लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का उदित व उत्तम योग में होना आवश्यक है। इनमें से किसी एक के भी अस्त या मलिन होने पर शुभ मुहूर्त नहीं बनता है। इस वर्ष अधिक मास का संयोग भी बना है। इस साल ज्येष्ठ मास दो महीने रहेगा। 02 मई से 31 मई और 1 जून से 29 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा। इस दौरान 15 मई से 17 जून तक मलमास रहेगा और इसमें शादियां नहीं होगी। फिर 25 जुलाई से 20 नवंबर तक चातुर्मास होंगे। इस दौरान भगवान विष्णु चार मास के लिए शयन में चले जाएंगे, इसीलिए चातुर्मास के चार महीने के दौरान विवाह आदि शुभ मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

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