फर्जीवाड़े का खेल:8 करोड़ के 630 फर्जी पट्टे बांटे जिम्मेदारों पर FIR तक दर्ज नहीं

नगर परिषद में खुल रही फर्जीवाड़े की परते चौंका रही है। कानून और प्रशासनिक कार्यवाही से बेखौफ होकर नगर परिषद अधिकारियों, कर्मचारियों ओर दलालों की गैंग ने मिलकर बाड़मेर शहर व आसपास के इलाकों में 630 से ज्यादा ऐसे पट्टे जारी कर दिए गए, जो नगर परिषद से डिस्पैच ही नहीं हुए है। यानि अलग से रजिस्टर बनाया और फर्जीवाड़ा कर नियम विरुद्ध पट्टे जारी किए गए। इसके लिए दलाल से लेकर परिषद के अधिकारियों ने मलाई खाई और करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा किया। बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी ने एक साल पहले विधानसभा में मामला उठाया था। कई बार शिकायतें हुई, लेकिन एक साल बाद भी इस फर्जीवाड़े की एफआईआर तक नहीं हुई है। बी सीरिज के पट्टे लेने वाले सैकड़ों लोग अब रसीदें लिए हुए नगर परिषद के चक्कर काट रहे है, लेकिन वहां उन्हें कोई जवाब तक नहीं मिल रहा है। फर्जी तरीके से जारी इन सभी पट्टों को नगर परिषद ने खारिज ताे कर दिया, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की। 319 पट्टों की पत्रावली मिली, बाकी फाइलें गायब नगर परिषद से 630 से ज्यादा बी सीरिज के पट्टे दिए गए है, लेकिन परिषद के रिकार्ड में सिर्फ 319 पट्टों की ही पत्रावलियां है, बाकी गायब है। एकल पत्रों की 94 पत्रावलियां मिली है, जिनसे बी सीरिज के पट्टे जारी किए गए है। जबकि 225 ऐसे पट्टे है, जो कॉलो​नी धारकों ने लिस्ट देकर जारी करवाए है। इनमें करणी विहार के 73, सांई नगर के 91, जसनाथ कॉलोनी के 46, रामदेव वाटिका के 11 पट्टे है। खातेदार ने भू परिवर्तन करवाकर नगर परिषद से बेचान किए गए भूखंड मालिकों के नाम से पट्टे जारी करवाए है। बी सीरिज के ये अधिकांश पट्टे पंजीयन भी हुए है। इसके अलावा भी रिकार्ड में पंजीयन के लिए भरा जाने वाला 29 नंबर फॉर्म मिले है। मामला विधानसभा में उठा, सभी पट्टे खारिज, लेकिन FIR नहीं हुई कांग्रेस सरकार के अंतिम वर्ष में नगर परिषद में कई अधिक​ारी-कर्मचारियों ने फर्जीवाड़े का बड़ा खेल खेला और करोड़ों रुपए की बंदरबांट कर दी। 2023 में सरकार ने जहां पट्टे जारी करने में रियायतें दी थी। वहीं अधिकारियों ने असली पट्टों की आड़ में सैकड़ों फर्जी पट्टे भी जारी कर दिए। इनके लिए अलग से कर्मचारियों ने डिस्पैच रजिस्टर बना रखा था। करीब 630 से ज्यादा पट्टे बी सीरिज के दिए गए। पट्टा क्रमांक के नंबर के बाद बी लिखा हुआ है, यानि ये पट्टा फर्जी है। क्योंकि नगर परिषद के डिस्पैच रजिस्टर में इन पट्टों की कोई एंट्री ही नहीं है। तत्कालीन आयुक्त, सभापति, एईएन-जेईएन समेत अन्य अधिकारियों ने इन पट्टों पर साइन तो किए है, लेकिन इन्हें रेगुलर डिस्पैच रजिस्टर में इंद्राज ही नहीं किया। सवाल ये है कि बी सीरिज के इन पट्टों के करीब 8 करोड़ रुपए नगर परिषद के कोष में जमा है। दरअसल ये वो पट्टे है, जो दलालों के मार्फत जारी किए गए। एक-एक दलाल ने सैकडों पट्टे जारी करवा कर दलाली खाई। नगर परिषद के तत्कालीन आयुक्त योगेश आचार्य, सभापति दिलीप माली ने ये पट्टे तो जारी कर दिए, लेकिन खुद के बचाव के लिए इन्हें डिस्पैच रजिस्टर में एंट्री नहीं करवाई और फर्जी डिस्पैच रजिस्टर से जारी करवा दिए। इन सभी 630 से ज्यादा पट्टों के क्रमांक नंबर के साथ बी लिखा है। अब लोग रसीदें लिए हुए नगर परिषद के चक्कर काट रहे है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है। “मैंने 2023 में नगर परिषद से प्रेमसिंह और पत्नी मोहिनी देवी के नाम दो भूखंड के पट्टे लिए थे। इसके लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपए जमा करवाए। डेढ़ साल से परिषद के चक्कर काट रहे है, कोई जवाब नहीं दे रहा है।” -प्रेमसिंह सारण, पीड़ित, भुरटिया रोड। “मैंने 2023 में नगर परिषद से प्रेमसिंह और पत्नी मोहिनी देवी के नाम दो भूखंड के पट्टे लिए थे। इसके लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपए जमा करवाए। डेढ़ साल से परिषद के चक्कर काट रहे है, कोई जवाब नहीं दे रहा है।” -प्रेमसिंह सारण, पीड़ित, भुरटिया रोड। “बी सीरिज के पट्टे हमने खारिज कर दिए है। इसकी सूचना स्वायत्त शासन विभाग को भेज दी है। सरकार स्तर पर अगर कोई निर्देश मिलेंगे तो एफआईआर भी दर्ज करवाएंगे।” -श्रवणसिंह राजावत, आयुक्त, नगर परिषद बाड़मेर। “नगर परिषद ने बी सीरिज के गलत पट्टे दिए है। इनका कोई लेआउट प्लान भी नहीं है। परिषद ने इन सभी पट्टों काे खारिज कर दिया है। सप्ताह में हम नगर परिषद के सभी पट्टों की जांच करवाएंगे। इस फर्जीवाड़े में दोषी लोगों के खिलाफ लीगल कार्यवाही करेंगे।” -राजेंद्रसिंह चांदावत, एडीएम, बाड़मेर।

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