फर्जी दस्तावेजों से गुरुजी, फिर प्रधानपाठक भी बन गए; 8 को नौकरी से निकाला

भास्कर न्यूज | धमतरी शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 2011 में दर्ज की गई एफआईआर में कार्रवाई जारी है। लोक आयोग की जांच और अनुशंसाओं के आधार पर धमतरी के डीईओ अभय कुमार जायसवाल ने 8 प्रधानपाठकों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि अभी 10 और शिक्षकों का मामला लोक आयोग में विचाराधीन है। डीईओ की कार्रवाई के बाद इनके बर्खास्त होने की संभावना भी प्रबल हो गई है। ऐसे में शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी कर रहे शिक्षकों में खलबली है। संभावना है कि अपनी नौकरी बचाने के लिए ये शिक्षक कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। बता दें कि जिले के चारों ब्लॉक में 380 से ज्यादा ऐसे शिक्षक हैं, जिनके फर्जी डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने की बात सामने आई है। चौंकाने वाली बात यह कि कुरूद जनपद में शिक्षाकर्मियों से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच शुरू होने के बाद संबंधित सभी फाइल ही जलकर नष्ट हो गईं। चंदना निवासी कृष्ण कुमार साहू ने साल 2007 में हुई शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। उन्होंने इस मामले में मगरलोड थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। डीईओ अभय कुमार जायसवाल ने बताया कि 2007 के भर्ती प्रकरण के संदर्भ में लोक आयोग रायपुर की सिफारिशें मिली थीं। मगरलोड थाने में पंजीकृत प्राथमिक जानकारी पत्र के तहत जिन 8 अभ्यर्थियों पर धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी, 201 भादवि और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(9) के तहत दर्ज एफआईआर हुई है, उन सभी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अन्य मामलों में भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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