फल विक्रेताओं से सड़े-गले सेब लेकर बनाया बायो एंजाइम:मंदसौर के किसान ने सुधारी मिट्टी की सेहत; 1 हजार बांस लगाकर एग्रो फोरेस्ट्री को भी धरातल पर उतारा

मंदसौर की मल्हारगढ़ तहसील के हरसौल गांव के प्रगतिशील किसान खुमान सिंह चुंडावत ने खेती को केवल रोजगार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना बना दिया है। साल 2017 से वे लगभग दस बीघा भूमि पर स्वयं खेती कर रहे हैं। शुरुआत मिट्टी परीक्षण से की और धीरे-धीरे रासायनिक खाद छोड़कर जैविक तकनीकों की ओर बढ़े। उनका कहना है कि जैविक उपाय बढ़ाने पर खरपतवार की समस्या भी कम हुई। वे मुख्य रूप से जीवामृत और बायो एंजाइम का इस्तेमाल करते हैं। जीवामृत को गोमूत्र, गुड़, अनाज और तिलहन मिलाकर तैयार करते हैं और सिंचाई के साथ दो लीटर प्रति क्यारी के हिसाब से उपयोग करते हैं। एंजाइम से फसल की गुणवत्ता और उपज बढ़ी
किसान ने बताया कि मुझे सबसे प्रभावशाली सेब से बना बायो एंजाइम लगा। इसके लिए मैंने फल विक्रेताओं से सड़े-गले सेब लेकर गुड़ या मिश्री के साथ 40-50 लीटर के बर्तन में लगभग 90 दिन तक किण्वित किया। इस एंजाइम से फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों बढ़ी हैं। चुंडावत का कहना है कि जैविक खेती करने वाले किसानों को हार्वेस्टर से गेहूं कटाई नहीं करानी चाहिए, क्योंकि इससे गेहूं में घुन लगने की आशंका अधिक रहती है। मजदूरों द्वारा कटाई और क्रेशर से दाना निकलवाना बेहतर रहता है। वे मानते हैं कि जैविक खेती में उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन दाम अच्छे मिल जाते हैं। इसलिए सरकार को बिक्री, प्रसंस्करण और बेहतर मूल्य के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि जैविक खेती केवल उत्पादन नहीं, बल्कि धरती, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के प्रति कर्तव्य है। ऐसे प्राकृतिक खेती की तरफ हुआ रुझान
चुंडावत बताते हैं कि मुझे गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर का संदेश मिला कि खेती योग्य भूमि वाले व्यक्ति को खेती से जुड़ा रहना चाहिए, वह भी जैविक खेती से। यहीं से उनका रुझान पूरी तरह प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ गया। चुंडावत एग्रो फॉरेस्ट्री को भी खेती का भविष्य मानते हैं। वे बताते हैं कि फसलों के साथ पेड़ों का संतुलित संयोजन न सिर्फ मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाता है, बल्कि खेत का तापमान नियंत्रित कर प्राकृतिक नमी भी बनाए रखता है। चुंडावत ने अपने खेत में लगभग 1000 बांस और 185 आंवला के पौधे लगाए हैं। इन पेड़ों से उन्हें अतिरिक्त आय के साथ दीमक नियंत्रण, बेहतर कार्बन अवशोषण और भूमि संरक्षण जैसे फायदे मिल रहे हैं। उनका कहना है कि एग्रो फॉरेस्ट्री जैविक खेती का मजबूत आधार है और किसानों को लंबे समय में स्थिर आय और स्वस्थ मिट्टी दोनों देती है। चुंडावत वन विभाग में अधिकारी थे, अब सेवानिवृत है। इन प्रगतिशील किसान से और जानें… 9893839292

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