फाजिल्का में बेघर सड़कों पर, रैन बसेरों में मुसाफिर:कड़ाके की ठंड में गरीब मजबूर, प्रशासन के दावों पर सवाल

इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड और धुंध के दौरान जहां लोग घरों में हर सुविधा होने के बावजूद कांपते रहते हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो छत न होने से फुटपाथ और सड़कों पर इस शीत लहर के दौरान रात गुजारने के लिए मजबूर हैं। हालांकि सवाल तब खड़े हुए जब यह पता लगा कि प्रशासन द्वारा बनाए गए रैन बसेरे में मुसाफिरों को ठहराने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जो प्रशासन और सरकार के दावों पर सवाल खड़े करते हैं। फाजिल्का के रेलवे स्टेशन रोड पर बेघर हुए लोगों के इन हालातों के साथ सरकार और प्रशासन द्वारा रैन बसेरों के किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत पर फीके पड़ते नजर आ रहे हैं। अगर फाजिल्का शहर के हालात की बात की जाए तो कई जगह पर लोग फुटपाथ, सड़क के किनारे, पुल के नीचे, सरकारी इमारत के सामने रजाई, कंबलों और पुराने कपड़ों के साथ रात गुजारते नजर आ रहे हैं। PHOTOS से जा​निए हकीकत रेलवे स्टेशन रोड की यह तस्वीरें हैं जहां पर रहते इन लोगों का कहना है कि ठंड में वह सड़क पर जैसे तैसे रात बिता लेते हैं। दो टाइम की रोटी का जुगाड़ इलाके के समाज सेवी कर रहे हैं। जबकि उनका कहना है कि इस रोड पर प्रताप बाग के पीछे बने नगर कौंसिल के रैन बसेरे में कुछ समय पहले बरसात आने की वजह से जब वह वहां गए तो वहां से उन्हें निकाल दिया गया। सड़क पर रहती महिला मीना ने बताया कि उसके पति की मौत हो चुकी है। किराए पर घर लेने के लिए उसके पास पैसा नहीं है। इसलिए वह सड़कों पर रात बिताने के लिए मजबूर है। जैसे तैसे रोटी का जुगाड़ कर लेती है और खुद खाना भी बना लेती है। हालांकि उसका कहना है कि चाहे वह बिहार की रहने वाली है, लेकिन उसके पास आईडी प्रूफ व अन्य दस्तावेज पंजाब के हैं और पंजाब में वोट भी डालती हैं। व्यवस्था तो है पर सबके लिए नहीं जबकि उधर प्रशासन द्वारा बेघरों के लिए रैन बसेरों में पूरे प्रबंध का दावा किया जाता है। पर असल सच्चाई तब सामने आई जब इन बसेरों में विजिट की गई। फाजिल्का के प्रताप बाग में बने रैन बसेरे में मुसाफिर रुकते हैं। जिनको ठंड में हीटर और टीवी जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। मौके पर देखा गया तो एक व्यक्ति यहां रह रहा था। जिसने बताया कि उसकी जमीन का मामला चल रहा है। वह काम के लिए आया और यहां पर रात गुजरता है। नशा करने वालों को नहीं आने देते यहां के रखवाले से जब सवाल किया गया कि सड़कों पर ठंड में रात गुजार रहे लोगों को यहां क्यों नहीं आने दिया जा रहा तो उन्होंने कहा कि वह लोग आए थे, वह लोग शराब पीते हैं और चिकन खाते हैं। जिससे वह यहां से चले गए और तर्क दिया गया कि उक्त लोग खुद यहां नहीं आते। जबकि सड़कों पर रात गुजार रहे लोगों का कहना है कि उन्हें यहां आने नहीं दिया जाता । करीब 20 लोग रुक कर चले गए हालांकि अंदर बेड पर आराम फरमा रहे एक शख्स को पूछा गया तो उसने कहा कि वह साथ में हलवाई की दुकान पर काम करता और आराम करने के लिए यहां आ जाता है। जबकि इसकी देखभाल करने वाले आकाशदीप व्यक्ति ने बताया कि इस महीने में करीब 20 मुसाफिर इस रैन बसेरे में रुके और चले गए ।

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