भास्कर न्यूज | जशपुरनगर जशपुर वनमंडल ने आगामी फायर सीजन के दौरान जंगलों को विनाशकारी आग से बचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में 16 जनवरी को वनमंडल स्तर पर एक विशेष अग्नि सुरक्षा कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वनों के प्राकृतिक पुनरुत्पादन को सुरक्षित रखना, वन्यजीवों की रक्षा करना और बहुमूल्य वन संपदा को आग से होने वाले नुकसान से बचाना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार फायर सीजन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार 16 फरवरी से 15 जून तक की अवधि को फायर सीजन माना जाता है। इस समय मौसम शुष्क रहता है और तेज हवाओं के कारण जंगलों में आग तेजी से फैलती है। ऐसी आग न केवल छोटी वनस्पतियों और घास को नष्ट करती है, बल्कि बड़े वृक्षों की लकड़ी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इससे पूरे पारिस्थितिक तंत्र को दीर्घकालिक और अपूरणीय क्षति पहुंचती है, जिसका असर वन्यजीवों के आवास और स्थानीय पर्यावरण पर भी पड़ता है। आगामी फायर सीजन को लेकर जशपुर वनमंडल ने इस बार अब तक की सबसे व्यापक और सटीक तैयारी शुरू की है। यह पहली बार होगा जब जिले के सभी वन परीक्षेत्रों में कर्मचारियों की उपलब्धता, अग्नि प्रहरियों की संख्या, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की भूमिका और उपलब्ध फायर फाइटिंग उपकरणों का पूरा लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आग लगने की स्थिति में किसी भी स्तर पर संसाधनों या मानवबल की कमी न हो। वन विभाग ने जंगलों में जानबूझकर आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। डीएफओ शशि कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति जंगल में आग लगाते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 एवं 79 तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत प्रकरण दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय पर त्वरित प्रतिक्रिया ही वनों को बड़े पैमाने पर होने वाली क्षति से बचा सकती है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए जशपुर डीएफओ शशि कुमार ने अग्नि प्रबंधन की विस्तृत रणनीति साझा की। उन्होंने कहा कि फायर सीजन के दौरान जंगलों में लगने वाली आग हर साल वन विभाग और सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। डीएफओ ने मैदानी अमले को स्पष्ट निर्देश दिए कि आग की सूचना मिलते ही संबंधित वन कर्मचारी और अधिकारी बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचें। अग्नि प्रहरियों और संयुक्त वन प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ समन्वय बनाकर आग बुझाने की कार्रवाई की जाए।


