भास्कर न्यूज | कवर्धा स्कूल शिक्षा विभाग ने 28 अप्रैल को फिर से शिक्षकों और शालाओं के युक्तियुक्तकरण का आदेश जारी किया है। यह वही प्रक्रिया है, जिसे अगस्त 2023 में भारी विरोध के बाद रोक दिया गया था। अब बिना किसी संशोधन के फिर से वही विवादित आदेश लागू किया गया है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन ने 2008 के स्कूल सेटअप के अनुसार ही युक्तियुक्तकरण के लिए मुख्यमंत्री से दखल देने मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान युक्तियुक्तकरण नीति त्रुटिपूर्ण है। इससे हर शासकीय प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल में एक-एक शिक्षक की कमी हो जाएगी। टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने कहा कि अब सवाल यह है कि कक्षा एक से पांच तक की पांच कक्षाओं को केवल दो शिक्षक कैसे पढ़ाएंगे? इससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी कामर्स विषय के एक-एक शिक्षक कम कर दिए गए हैं। इससे कक्षा संचालन मुश्किल होगा। एसोसिएशन ने कहा कि युक्तियुक्तकरण नीति को बिना आपत्ति दावा लिए लागू किया गया है। शिक्षकों और स्कूलों के समायोजन के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर समिति बनाई जा रही हे। यह समिति चिह्नांकन कर पदस्थापन आदेश जारी करेगी। शिक्षकों के लिए काउंसिलिंग होगी। पढ़ाई होगी प्रभावित जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी का कहना है कि इस नीति से सामान्य और निम्न वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। शिक्षा विभाग में पदों का आधार 2008 का सेटअप है। इसलिए उसी के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति होनी चाहिए। 2008 के सेटअप के अनुसार प्राचार्य, व्याख्याता, शिक्षक, प्रधान पाठक के पदों पर पदोन्नति की जाए। शैक्षिक गुणवत्ता पर असर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने बताया कि 2008 के सेटअप के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में एक प्रधान पाठक और दो सहायक शिक्षक का प्रावधान है। पूर्व माध्यमिक स्कूलों में एक प्रधान पाठक और चार शिक्षक अनिवार्य हैं। लेकिन नए आदेश में इसका पालन नहीं किया गया है। इससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।


