भास्कर न्यूज | जालंधर ऑल इंडिया फुटबाल फेडरेशन की तरफ से 79वीं नेशनल फुटबॉल चैंपियनशिप फॉर संतोष ट्रॉफी में पंजाब की टीम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6 साल बाद कांस्य पदक जीता है। फाइनल राउंड 21 जनवरी से 8 फरवरी तक असम के डिब्रूगढ़ में खेला गया। पंजाब की टीम को पूल बी में रखा गया था, जहां उसका मुकाबला सर्विसेज, रेलवे, केरल, मेघालय और ओडिशा जैसी मजबूत टीमों से हुआ। टूर्नामेंट में अपने पहले मुकाबले में पंजाब को केरल के खिलाफ 1-3 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद मेघालय के साथ खेला मुकाबला 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। रेलवे के खिलाफ पंजाब 0-2 से पराजित रहा, लेकिन टीम ने सर्विसेज को 1-0 से हराकर शानदार वापसी की। पूल का आखिरी मुकाबला ओडिशा के खिलाफ खेला गया, जिसमें पंजाब ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 5-2 से जीत दर्ज की। पूल मुकाबलों के बाद पंजाब ने 7 अंकों के साथ पूल बी में तीसरा स्थान हासिल किया और क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। क्वार्टर फाइनल में पंजाब का मुकाबला तमिलनाडु से हुआ। यह मुकाबला निर्धारित समय में 1–1 की बराबरी पर समाप्त हुआ, जिसके बाद पेनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया। शूटआउट में पंजाब ने 5-2 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। सेमीफाइनल में पंजाब का सामना एक बार फिर केरल से हुआ, जहां पंजाब को 0-4 से हार झेलनी पड़ी। इसके बावजूद पंजाब ने रेलवे के साथ संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया, जो टीम के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। टीम मैनेजर पूर्व जिला खेल अधिकारी विजय कुमार वैश ने बताया कि छह साल बाद पहली बार पंजाब की टीम ने ने संतोष ट्रॉफी में तीसरा स्थान हासिल किया है। जबकि यह पहला मौका है, जब पंजाब के पूल की सभी टीमें सेमीफाइनल तक पहुंचीं, जो टूर्नामेंट के उच्च स्तर को दर्शाता है। टीम के हेड कोच जसवंत सिंह परमार और सहायक कोच सुमित कुमार ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। पंजाब के फॉरवर्ड हिमांशु टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ स्कोरर रहे। उन्होंने ओडिशा के खिलाफ एक हैट्रिक सहित सबसे अधिक गोल दागकर टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई। टीम में जालंधर से संबंधित मैनेजर विजय कुमार वैश, सहायक कोच सुमित कुमार, जगदीप सिंह, सतबीर सिंह और हरमनप्रीत सिंह शामिल रहे।


