पंचानन कर्माकर एक भूले-बिसरे बंगाली शिल्पकार थे, जिन्होंने पहली बार बंगाली फॉन्ट बनाया था। लेकिन, अंग्रेजों ने इस आदमी को नहीं पहचाना, जो बांग्ला समाज के गौरव थे। रजत चक्रवर्ती ने इन पर ‘पंचाननेर हराफ’ उपन्यास लिखा। इसी उपन्यास पर आधारित नाटक ‘आक्षरिक’ का मंचन बुधवार को शौर्य सभागार, डोरंडा में किया गया। एनएसडी के सहयोग से हो रहे नाट्य महोत्सव में इस नाटक को देखने बड़ी संख्या में बांग्ला भाषी लोग पहुंचे। कलाकारों की एक्टिंग के साथ नाटक के गीत व संगीत को लोगों ने खूब पसंद किया। प्रॉप का इस्तेमाल बेहतरीन ढंग से कलाकारों ने किया। अनीक समूह ने 2 घंटे तक झुमाया कोलकाता के अनीक समूह ने इस नाटक का मंचन किया। करीब 2 घंटे लंबे नाटक को देख लोग झूमते रहे। निर्देशन देबाशीश रे ने किया। संगीत पं. नीलकंठ अभ्यंकर का था। मुख्य कलाकार गौरी पाटिल, संजय डोले, अभय जाबड़े, विश्वास थे। पुष्कर केलकर ने नाटक का प्रकाश संयोजन किया जो निखर कर आया। नाटक की खूबी कलाकारों की एक्टिंग के साथ उनका नृत्य व गीत भी रहा।


