हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के फुलडीहा गांव में बोरसी (अंगीठी) के धुएं से दम घुटने के कारण नानी सुनहरा उर्फ मुरैना देवी (70) और नतिनी माया कुमारी (17) की मौत हो गई। वहीं, माया की मां किरण देवी (40) की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदिनीनगर रेफर किया गया है। नबीनगर (बिहार) के तेतरिया गांव निवासी सुनहरा देवी बेटी किरण देवी के घर फुलडीहा आई हुई थीं। ठंड से बचाव के लिए रात को घर के एक कमरे में बोरसी जलाकर तीनों सो गईं। कमरे का दरवाजा बंद होने से उसमें धुआं भर गया और तीनों बेहोश हो गईं। सुबह जब परिजनों और ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, तो तीनों को कमरे से बाहर निकालकर अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद ले जाया गया। पर, जांच के बाद डॉक्टरों ने सुनहरा देवी और माया कुमारी को मृत घोषित कर दिया। वहीं, किरण देवी को प्राथमिक उपचार के बाद मेदिनीनगर भेज दिया गया। किरण देवी के पति मिथिलेश राम बीएसएफ में कार्यरत हैं। उन्हें घटना की सूचना दे दी गई। अंगीठी के लिए वेंटिलेशन जरूरी
डॉ. ने बताया कि सर्दी के मौसम में बंद कमरे में अंगीठी या बोरसी जलाकर सोना बेहद खतरनाक है। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है, जो गंधहीन और अत्यंत विषैली होती है। व्यक्ति को इसका आभास नहीं होता और यह धीरे-धीरे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देती है। बंद कमरे में वेंटिलेशन नहीं होने के कारण यह गैस बाहर नहीं निकल पाती। नींद के दौरान व्यक्ति बेहोश हो जाता है और सोते-सोते दम घुटने से मौत हो सकती है। यदि अंगीठी का उपयोग करना हो तो कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें। सोने से पहले आग बुझा दें। – डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू


