सतना के बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चों की आहार नली में फंसे सिक्के को निकालने का तरीका निकाला है। भोपाल में आयोजित कॉन्फ्रेंस में उनके शोध को देश में पहला स्थान मिला है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने 15 लाख रुपए की पीडियाट्रिक एंडोस्कोपी मशीन के बजाय मात्र 80 रुपए के फॉली कैथेटर से यह किया है। सतना के मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक विभाग के एचओडी डॉ. प्रभात सिंह बघेल एक साल में 68 बच्चों की आहार नली से सिक्के निकाल चुके हैं। उनके इसी शोध को लेकर उन्होंने भोपाल में 12 से 14 दिसंबर के बीच आयोजित देश भर के शिशुरोग विशेषज्ञों की वार्षिक कॉन्फ्रेंस में सहभागिता की थी। एक साल में 68 बच्चों की आहार नली से सिक्के निकाले
डॉ. प्रभात ने बताया कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान उन्होंने अन्य शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव के साथ मिलकर जिला अस्पताल में 68 बच्चों की आहार नली से फॉली कैथेटर की मदद से सफलतापूर्वक सिक्के निकाले हैं। पहले ऐसे मामलों में पीडियाट्रिक एंडोस्कोपी और गैस्ट्रो विभाग न होने के कारण बच्चों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता था। आहार नली में सिक्का फंसना एक आपातकालीन स्थिति होती है, जिससे बच्चों को गंभीर दर्द, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ (चोकिंग) जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यह स्थिति तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की मांग करती है। 700 शिशुरोग विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत किया शोध पत्र
डॉ. प्रभात ने अपने इसी विषय पर एक शोध पत्र तैयार किया था, जिसे भोपाल में आयोजित कॉन्फ्रेंस में देश भर से आए 700 शिशुरोग विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उनके इस शोध को देश भर में सराहना मिली और इसे प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) ने भी डॉ. प्रभात के इस प्रयास की प्रशंसा की है।


