प्रदेश के सबसे बड़े जेके लोन अस्पताल में भर्ती होने वाले हरेक बच्चे को संक्रमण से बचाने, बेड की संख्या में इजाफा, क्वालिटी युक्त इलाज और सुविधाओं का विस्तार करने के लिए करीब 80 करोड़ रुपए की लागत से 10 मंजिला 500 बेड का आईपीडी टावर तीन साल से फाइल में अटका है। आईपीडी टावर का तीन बार प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अभी तक सरकार की अनुमति का इंतजार है। एसएमएस अस्पताल, जनाना अस्पताल चांदपोल एवं महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट की तर्ज पर जेके लोन में दस मंजिला टावर का सपना टूटता नजर आ रहा है। हकीकत (आंकड़े सिर्फ जेके लोन अस्पताल के हैं) इसलिए जरूरत; अभी एक बेड पर दो-दो बच्चे रहते हैं भर्ती डॉक्टरों के अनुसार स्वाइन फ्लू, कोरोना महामारी के दौरान ही नहीं मौसमी बीमारियां डेंगू, स्क्रब टाइफस, चिकनगुनिया के मामले बढ़ने पर अनेक बार बेड नहीं मिलने पर एक पर ही दो-दो बच्चों को रखना पड़ता है। पीडियाट्रिक मेडिसिन, सर्जरी जैसे विभाग में बच्चों को बेड का दर्द झेलना पड़ता है। ऐसे में आईपीडी टावर के निर्माण के बाद बेड बढ़ने पर ये दिक्कत नहीं रहेगी। इसके अलावा सुविधाओं के विस्तार के लिए भी आईपीडी टावर बनना चाहिए। जांच के लिए एसएमएस भेज रहे : जेके लोन में एमआरआई जांच की सुविधा नहीं है, जिससे गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को एमआरआई जांच के लिए 15 से 20 बच्चों को एसएमएस में भेजना पड़ता है। ज्यादा दिक्कत आईसीयू में भर्ती वालो को लाने ले जाने में काफी मुश्किल होती है। और छोटे बच्चे की एमआरआई के लिए नींद की दवा देनी पड़ती है। जिससे मरीज, परिजन एवं स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ता है।


