राजस्थान विधानसभा में एसआईआर के मुद्दे पर निकली पर्ची ने इतना हंगामा करवाया कि सदन 2 बार स्थगित करना पड़ा। शुक्रवार सुबह स्पीकर चैंबर में मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत के नाम एसआईआर पर बोलने की अनुमति की पर्ची निकाली गई। शून्यकाल में स्पीकर ने गैसावत का नाम पुकारा। वे बोलने लगे ही थे कि संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम खड़े हुए और कहा कि- इस मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती, यह मुद्दा सरकार से जुड़ा नहीं है। इतने में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि स्पीकर ने इजाजत दे दी तो आपको क्या परेशानी है? एसआईआर में फर्जी फॉर्म के बंडल देकर कौन गया, उसकी जांच हो। इतने में हंगामा हो गया। स्पीकर ने कहा- मैंने बोलने की अनुमति दे दी। लेकिन कांग्रेसी हंगामा करते हुए वेल की तरफ बढ़े। दोपहर 12:55 बजे सदन 2 बजे तक स्थगित कर दिया। सदन 2 बजे शुरू हुआ तो फिर हंगामे से आधे घंटे के लिए स्थगित कर दिया। 2 बार सदन स्थगित होने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। स्पीकर बोले-विषय विशेषज्ञों से राय लेंगे एसआईआर पर पक्ष-विपक्ष के हंगामे को देखते हुए स्पीकर वासुदेव देवनानी ने कहा कि इस पूरे विषय पर कानून विशेषज्ञों और पार्लियामेंट सचिवालय से विचार-विमर्श किया जाएगा। उसके बाद एसआईआर पर चर्चा का निर्णय किया जाएगा। विशेषज्ञ की राय आए, तब तक सदन में संयम बनाए रखे। जैसे ही वहां से बात हो जाएगी, उसके बाद ही विधानसभा में इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा। जूली बोले- लोकसभा में चर्चा हो चुकी तो यहां क्यों नहीं टीकाराम जूली ने कहा कि 9 दिसंबर को लोकसभा में निर्वाचन सुधारों पर चर्चा हुई थी, उसी तरह विधानसभा में भी कम से कम आधे घंटे की चर्चा करवाई जाए। इस पर मंत्री जोगाराम पटेल ने जवाब देते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। संसद कानून बनाती है, इसलिए वहां चर्चा हो सकती है। सामाजिक पेंशन पर जवाब नहीं तो वॉकआउट की धमकी प्रश्नकाल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन और ओबीसी स्कॉलरशिप से जुड़े सवाल के जवाब नहीं मिलने पर विपक्ष ने वॉकआउट की धमकी दे दी। इसी बीच जूली सवाल कर रहे थे, लेकिन उनका माइक बार-बार बंद किया जा रहा था। इससे झल्लाए जूली ने माइक पर मारते हुए कहा- क्या लगा रखा है ये..? चौथी बार उठा लड़कियों के घर से भागने का मुद्दा तारानगर के कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुडानिया ने सदन में कहा कि हमारे लिए शर्म और दुख की बात है कि लड़कियां घर छोड़ भाग रही हैं। मैंने ऐसी घटनाएं देखी हैं कि लड़की जब वापस आती है तो मां-बाप को पहचानने से मना कर देती है। थोड़ी देर बाद पिता ट्रेन के आगे कूद गया। पक्ष और विपक्ष से अपील की कि इस सामाजिक समस्या का समाधान निकाला जाए। बता दें कि दो साल में चौथी बार यह मुद्दा सदन में उठाया गया है।


