बच्चों के विकास के लिए सरल गतिविधि आधारित शिक्षा जरूरी: शर्मा

महासमुंद ब्लाक स्थित बीआरसी में आयोजित नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित प्रशिक्षण के चौथे दिन डीएमसी रेखराज शर्मा और सहायक परियोजना समन्वयक संपा बोस ने प्रशिक्षण का निरीक्षण किया। यह प्रशिक्षण सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी विषय के शिक्षकों के लिए आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया (छात्रों को ज्ञान, कौशल और मूल्य सिखाने की प्रक्रिया) को अधिक प्रभावी, सरल और गतिविधि-आधारित बनाना है। निरीक्षण के दौरान डीएमसी रेखराज शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सभी तरह से विकास के लिए सरल से सरल गतिविधि-आधारित शिक्षा आवश्यक है। नीति में यह स्पष्ट प्रावधान है कि शून्य आयु से अंतिम वर्ष तक मनुष्य निरंतर सीखता रहता है। इसलिए शिक्षकों को स्वयं सीखते हुए बच्चों को आगे बढ़ाने का कार्य करना चाहिए। उन्होंने रटंत पद्धति को समाप्त कर ज्ञानात्मक, अनुप्रयोगात्मक और समझ आधारित प्रश्नों के निर्माण पर बल दिया। ब्लूप्रिंट के माध्यम से प्रभावी मूल्यांकन करने के निर्देश दिए। एपीसी संपा बोस ने कहा कि मिशन लाइफ के अंतर्गत विद्यालयों में संचालित ईको क्लब की गतिविधियों की जानकारी फोटो के माध्यम से साझा की जाए। उन्होंने विद्यालय परिसरों में अधिक से अधिक हरियाली लाने, शासन के प्रदत्त राशि के समुचित उपयोग और पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत हो रहे कार्यों के प्रदर्शन पर भी विशेष जोर दिया। प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर रोशन लकरा, राधेश्याम ध्रुव, गोपेश्वरी साहू, लक्ष्मी मानिकपुरी, सीमा साहू, नीतिन श्रीवास्तव ने प्रशिक्षण की अवधारणा, उद्देश्य और व्यवहारिक पक्षों को गंभीरतापूर्वक स्पष्ट किया। शिक्षण पद्धति का व्यावहारिक अभ्यास किया गया: प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने समूह बनाकर आपसी सहयोग से प्रयोग किए और गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धति का व्यावहारिक अभ्यास किया। इस मौके पर बीआरसीसी जागेश्वर सिन्हा ने चार दिन के प्रशिक्षण का प्रतिवेदन प्रशिक्षार्थियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

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