मध्य प्रदेश में बच्चों पर बढ़ते यौन अपराध के मामले पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस की डिवीजन बैंच ने राज्य और केन्द्र सरकार के खिलाफ नोटिस जारी किया हैं। हाई कोर्ट ने सरकार के संबंधित विभागों से पूछा है कि वो बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाए गए पॉक्सो एक्ट के प्रचार-प्रसार के लिए आखिर क्या कर रहे हैं। ”पॉक्सो एक्ट की धारा 43 और 44 के तहत अपराधों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राज्य बाल अधिकार आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव, मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव और मध्यप्रदेश के डीजीपी को 4 हफ्तों में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।” चीफ जस्टिस ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकांश मामलों में हमने पाया कि पीड़ित बच्चों की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है और अपराधियों की उम्र 19 से 22 वर्ष के बीच है। चीफ जस्टिस की बैंच ने कहा कि उनकी राय में ये एक गंभीर मुद्दा है और ये देश के युवाओं के भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। पॉक्सो एक्ट का निर्माण महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा साल 2012 में Pocso Act -2012 के नाम से किया गया था। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार से सैक्सुअल शोषण करने वाले व्यक्ति पर इस एक्ट के तहत कार्यवाही की जाती है। इस कानून का निर्माण नाबालिग बच्चों के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न, यौन शोषण, पोर्नोग्राफी और छेड़छाड़ के मामलों को रोकने के लिए किया गया था। इस कानून के द्वारा अलग-अलग अपराधों के लिए अलग सजा का प्रावधान हैं। बहरहाल हाईकोर्ट ने मामले पर राज्य और केन्द्र सरकार से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई 4 हफ्तों बाद तय कर दी हैं। हाई कोर्ट की बैंच द्वारा केंद्र-राज्य सरकार को नोटिस जारी किया गया हैं…. ये खबर भी पढ़े… बेटियों को न्याय कब?:हाई कोर्ट में भी नाबालिग से दुष्कर्म के 4928 केस पेंडिंग, इनमें से 50% आरोपी जमानत पर


