भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा विधानसभा में बजट सत्र 28 जनवरी से जारी है और अब 11 फरवरी को राज्य बजट आना है। यह भजनलाल सरकार का दूसरा पूर्ण बजट होगा, जिसे “विकसित राजस्थान” के लक्ष्य के तहत 2026-27 के लिए पेश किया जाएगा। चूंकि वागड़ जनजाति क्षेत्र है, इसलिए यहां विकास की दृष्टि से बजट से लोगों की खास उम्मीदें रहती हैं। ये उम्मीदें क्या हैं, बांसवाड़ा की इस बार प्रमुख उम्मीदें क्या हैं, दैनिक भास्कर ने जिले के अलग-अलग सेक्टर के उद्यमियों से यह जानने की कोशिश की तो कई मुद्दे निकलकर सामने आए। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा उद्योगों के लिए जमीन नहीं मिलने का है। टीएसपी में उद्योग लगाने के लिए कोई छूट नहीं दी जा रही है। बांसवाड़ा के नजदीकी 5 बड़े शहरों में जाने के लिए फोर-लेन नहीं है। गुजरात और मध्यप्रदेश की तुलना में राजस्थान में बिजली दर 1 से 2 रुपए प्रति यूनिट तक महंगी है। पर्यटन की प्रचुर संभावनाओं के बावजूद सड़क मार्ग, वायु मार्ग, रेल मार्ग से कटा होने के कारण यहां का पर्यटन उद्योग ठप है। उद्योगपतियों का कहना है कि 70-75 के दशक में बांसवाड़ा में पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी दो बड़े उद्योग लेकर आए थे, वो ही आज हैं। इसके बाद की सरकारें कोई नया उद्योग नहीं ला सकी। सरकारें निवेश की उम्मीद करती हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में निवेशक कैसे आएं।
उद्योगपतियों का दर्द है कि ऐसी ही कई घोषणाएं कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। माही डैम में चाचा कोटा जिले का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल है लेकिन इसे विकसित करने के लिए आज तक कोई बजट नहीं दिया गया। जबकि प्रस्ताव कई बार भेजे जा चुके हैं। मीत जैन, सीए, सदस्य, वागड़ टैक्स बार एसोसिएशन 1. ट्रेन : उद्योगों के लिए माल परिवहन का सबसे सस्ता और सुरक्षित साधन ट्रेन है, लेकिन बांसवाड़ा में ट्रेन नहीं है। जबकि बांसवाड़ा की सीमाएं एमपी और गुजरात से सटी हुई हैं। व्यापारी अपना माल कैसे भेजें और मंगवाएं, यह बड़ी समस्या है। 2. सड़क : माल परिवहन का दूसरा बड़ा जरिया सड़क मार्ग है। बांसवाड़ा से रतलाम, अहमदाबाद, उदयपुर, निम्बाहेड़ा और दाहोद तक जाने के लिए सिर्फ टू-लेन सड़क है। जबकि ये पांचों शहर जिले के सबसे नजदीकी बड़े शहर हैं। 3. बिजली : उद्योगों को निर्बाध यानी बिना ट्रिपिंग के बिजली मिलना बड़ी समस्या है। इंडस्ट्रियल एरिया के लिए अलग से जीएसएस बनाए जाएं, जिन पर कटौती का शेड्यूल न हो। अभी कई घंटों तक उद्योग बंद पड़े रहते हैं। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और गुजरात में राजस्थान के मुकाबले 2 से 3 रुपए प्रति यूनिट तक बिजली सस्ती है। महंगी बिजली होने के कारण बांसवाड़ा के बजाय टेक्सटाइल इंडस्ट्री मध्यप्रदेश चली गई, जबकि यहां पानी की उपलब्धता प्रचुर है। दीनदयाल शर्मा, सचिव, बांसवाड़ा जिला उद्योग संघ 4. जमीन : बांसवाड़ा में रीको के पास उद्योगों को देने के लिए सरकारी जमीनें नहीं हैं। जो हैं उनका रकबा इतना कम है कि उद्योग लग नहीं पाते। उद्योगपतियों को महंगे दामों पर निजी स्तर से जमीनें लेनी पड़ती हैं। निजी जमीनों का कन्वर्जन कराना मुश्किल काम है। भू-उपयोग परिवर्तन की राशि जयपुर के बराबर है। बांसवाड़ा टीएसपी एरिया है, अति पिछड़े इलाकों में शामिल है। यहां इसे फ्री करें तब ही निवेशक आगे आएंगे। जैनेंद्र त्रिवेदी, संरक्षक, क्रशर प्लांट एसोसिएशन मुजफ्फर अली, अध्यक्ष, शताब्दी वेलफेयर सोसायटी सुनील दोसी, संरक्षक, बीसीसीआई 5. टीएसपी में विशेष छूट : टीएसपी एरिया में उद्योग स्थापित करने के लिए किसी भी प्रकार की छूट नहीं है। एक तो टीएसपी में उद्योग लगाना मुश्किल, दूसरा कोई विशेष छूट नहीं है, तो उद्योगपति टीएसपी से बाहर उद्योग लगाने में ज्यादा रुचि लेते हैं। 6. सिंगल विंडो : उद्योगों के लिए सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया था ताकि उद्यमियों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। सरकार का दावा है कि जिला उद्योग केंद्र में सिंगल विंडो सिस्टम है जबकि उद्योगों के लिए क्लियरेंस लेना इतना मुश्किल है कि हताश होकर उद्यमी अन्यत्र चले जाते हैं। पलक गुप्ता, सीए, सदस्य, वागड़ टैक्स बार एसोसिएशन 7. पर्यटन : बांसवाड़ा में प्राकृतिक सौंदर्य और पानी भरपूर है। लेकिन पर्यटन उद्योग को अभी तक प्रॉपर तरीके से डवलप नहीं किया गया है। साल 2012-13 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बांसवाड़ा में पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़ मंजूर किए थे, वे आज तक नहीं मिले। पर्यटन विभाग ने आरटीडीसी का एक भी होटल बांसवाड़ा को नहीं दिया। ऐसे में पर्यटक आ भी जाएं तो ठहरें कहां? बांसवाड़ा की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन बड़ा जरिया बन सकता है। जबकि सच यह है कि बाहर का कोई व्यक्ति यहां मकान लेकर रहना ही नहीं चाहता। 8. रिकॉर्ड में सुधार : वर्ष 1954-55 में सेटलमेंट के समय से ही बिलानाम भूमि में से कुछ भूमि राजस्व रिकॉर्ड में किस्म जंगल दर्ज है। इसमें से काफी भूमि औद्योगिक रूप में काम आ रही है। लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में जंगल दर्ज होने से उद्योगपतियों को अभी तक मालिकाना हक नहीं मिला है। ठीकरिया इंडस्टियल एरिया में भी रिकॉर्ड का विवाद होने से रीको लोन के लिए एनओसी नहीं देता है। शैलेंद्र वोरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, बीसीसीआई सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। 9. एमएसएमई का फायदा नहीं : प्रदेश में एमएसएमई नीति 2024 और राज्य की अन्य योजनाओं के तहत छोटे और मध्यम उद्योगों को आसान ऋण सुविधा दी जा रही है। योजनाओं में उद्यमियों को 10 करोड़ रुपए तक के ऋण पर 6 से 9 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान मिलता है। कई मामलों में बिना गारंटी ऋण की सुविधा भी है। 10. रिंग रोड : राज्य सरकार ने पिछले बजट में बांसवाड़ा शहर के लिए रिंग रोड की घोषणा की थी। नगर परिषद ने सर्वे का टेंडर तो कर दिया लेकिन वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया। क्योंकि सरकार ने बजट का प्रावधान ही नहीं किया, न डीपीआर तैयार करने का पैसा दिया। राजस्थान स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन की एमएसएमई लोन योजना के तहत उद्योगों को टर्म लोन के रूप में 5 करोड़ तक की राशि दी जाती है। इससे नए उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों के विस्तार में मदद मिलती है। लेकिन बांसवाड़ा के युवाओं को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा। बैंक वाले लोन को पास ही नहीं करते। अनिल मेठानी, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, बांसवाड़ा


